राज्यसभा में सांसद विवेक तन्खा ने हवाई यातायात बाधा पर उठाए सवाल
निजी कोचिंग का बोझ और अधिकरणों की कार्यकुशलता पर उठाए सवाल

भोपाल, यशभारत । राज्यसभा में सांसद विवेक के तन्खा ने संसद में देश की हवाई सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए हैं। यह सवाल ऐसे समय उठाया गया है जब हवाई यात्राएं बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं। इसके साथ ही श्री तन्खा ने शिक्षा व्वस्था और न्यायिक अधिकरणों की कार्यकुशलता को लेकर महत्वपूर्ण प्रश्र उठाए हैं। तन्खा के प्रश्रों पर विभिन्न मंत्रालयों ने जवाब प्रस्तुत किए हैं। तीन संवेदनशील क्षेत्रों में सरकारी तैयारी और जवाबदेही को एक बार फिर केंद्र में ला दिया।
तन्खा के सवाल पर सरकार ने मानी तकनीकी चूक
विवेक तन्खा ने पूछा कि क्या 6 और 7 नवंबर को सर्वर प्रणाली में खराबी से करीब 800 उड़ानें प्रभावित हुईं। इस प्रश्र के जवाब में नागर विमानन मंत्रालय ने स्वीकार किया कि 6 नवंबर को दिल्ली एयरपोर्ट के एयर ट्रैफिक मैनेजमेंट ऑटोमेशन सिस्टम में गंभीर देरी हुई थी, जिससे उड़ान योजना संदेशों के वितरण में बाधा आई। मंत्रालय ने यह भी बताया कि जीएनएसएस संकेतों में अनियमितता की जांच केंद्रीय एजेंसियां कर रही हैं, और दोबारा ऐसी स्थिति न बने इसके लिए एएआई ने नई हवाई यातायात सेवा संदेश हैंडलिंग प्रणाली के साथ मौजूदा आईपी आधारित स्वचालित संदेश स्विचिंग प्रणाली प्रणाली लागू कर दी है।
राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा ने निजी कोचिंग के बढ़ते बोझ को लेकर भी संसद में प्रश्न उठाया उन्होंने ने देश के 58000 करोड़ रुपये से अधिक के निजी कोचिंग उद्योग और परिवारों पर पडने वाले आर्थिक दबाव पर सवाल उठाए। शिक्षा मंत्रालय ने माना कि अनियमित कोचिंग केंद्रों की बढ़ती संख्या चिंता का विषय है, और इस क्षेत्र को नियंत्रित करने के लिए 2024 में राज्यों को विस्तृत दिशा-निर्देश भेजे गए हैं। सरकार ने यह भी बताया कि स्कूल-आधारित शिक्षा को मजबूत करने के लिए समग्र शिक्षा योजना के तहत कई पहलें चल रही हैं।
अधिकरणों की प्रभावशीलता पर उठाया सवाल
विवेक तन्खा ने तीसरा प्रश्न अधिकरण सुधार अधिनियम 2021 के बाद न्यायाधिकरणों की कार्यकुशलता, लंबित मामलों और निपटान दर पर आंकड़ों के बारे में पूछा। जवाब में विधि और न्यायल मंत्रालय में राज्यमंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने बताया कि संबंधित मंत्रालयों ने किसी भी स्थायी या उभरती बाधा की सूचना नहीं दी, लेकिन 19 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने पूरा अधिकरण सुधार अधिनियम रद्द कर दिया, जिसके बाद अधिकरण व्यवस्था में बड़ा ढांचा तैयार करना पड़ेगा।







