पीएम श्री पर्यटन सेवा या ‘हवाई ठगी’? फ्लाई ओला का कारनामा: यात्रियों को बताया ‘फ्लाइट कैंसिल’ और चहेतों को लेकर उड़ गया हेलीकॉप्टर

जबलपुर। मध्य प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई ‘पीएम श्री पर्यटन हेली सेवा’ अब विवादों के घेरे में है। जबलपुर में इस सेवा का संचालन कर रही कंपनी ‘फ्लाई ओला’ पर यात्रियों के साथ धोखाधड़ी और टिकटों की हेराफेरी के गंभीर आरोप लगे हैं। ताज़ा मामले में कंपनी ने एक परिवार को उड़ान रद्द होने का झूठ बोलकर छोड़ दिया, जबकि वही हेलीकॉप्टर अन्य मुसाफिरों को लेकर उड़ान भर गया।
आम आदमी को ‘झुनझुना’, रसूखदारों को उड़ान?
जबलपुर निवासी जयेंद्र सिंह के साथ हुई घटना ने सिस्टम की पोल खोल दी है। उन्होंने 23 दिसंबर को बांधवगढ़ के लिए 3 टिकट बुक किए और 11,250 रुपये का भुगतान भी किया। लेकिन कंपनी ने उन्हें टिकट नहीं दिया और ऐन वक्त पर ‘फ्लाइट कैंसिल’ होने का संदेश भेज दिया।
हैरानी की बात यह रही कि जिस फ्लाइट को रद्द बताया गया, उसने तय समय पर डुमना एयरपोर्ट से उड़ान भरी। सवाल उठ रहे हैं कि क्या आम जनता के टिकट काटकर रसूखदारों को पिछले दरवाजे से एंट्री दी जा रही है? क्या यहाँ टिकटों की ब्लैक मार्केटिंग चल रही है?
नियमों की मार: भेड़ाघाट से एयरपोर्ट शिफ्ट और ‘वजन’ पर पैनाल्टी
पर्यटकों में नाराजगी सिर्फ ठगी को लेकर नहीं, बल्कि बदलते नियमों को लेकर भी है:
लोकेशन शिफ्ट: उड़ान की अनुमति भेड़ाघाट से थी, लेकिन अब सुरक्षा का हवाला देकर इसे शहर से दूर डुमना एयरपोर्ट शिफ्ट कर दिया गया है। इससे धुआंधार देखने की उम्मीद पालने वाले पर्यटक मायूस हैं।
मोटापे का जुर्माना: कंपनी ने नियम बनाया है कि यदि किसी यात्री का वजन मानक से अधिक है, तो उसे दो सीटों का किराया देना होगा। इस नियम को लोग ‘मनमानी वसूली’ बता रहे हैं।
रिफंड के लिए दिल्ली के चक्कर, स्थानीय अधिकारी बेबस
ठगी का शिकार हुए यात्री जब पैसे वापस मांगने पहुँचते हैं, तो स्थानीय प्रतिनिधि जितेंद्र राय पल्ला झाड़ लेते हैं। यात्रियों को बताया जाता है कि रिफंड के लिए दिल्ली स्थित मुख्य कार्यालय (जेंटसर्व एविएशन प्राइवेट लिमिटेड) को ई-मेल करें। जबलपुर में कोई हेड ऑफिस न होने के कारण यात्री खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं।
“रिफंड की प्रक्रिया में तेजी लाई जाएगी। उड़ान कैंसिल बताकर दोबारा बहाल करने के मामले की हम जांच करेंगे।” — अंकित गौरव, नोडल अधिकारी, पीएमश्री पर्यटन हेली सेवा
प्रमुख बिंदु जो सवाल खड़े करते हैं:
जिस सेवा के साथ प्रधानमंत्री का नाम जुड़ा हो, वहां पारदर्शिता क्यों नहीं है?
पैसा जमा होने के बावजूद टिकट क्यों नहीं जारी किया गया?
स्थानीय स्तर पर शिकायत निवारण केंद्र क्यों नहीं है?







