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बड़ी खबर : जिला अस्पताल के एसएनसीयू में छह माह में 80 नवजातों की मौत : मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने बनाया-जांच के लिए चार सदस्यीय दल…. देखें पूरा वीडियो

सिवनी यश भारत:-सिवनी जिला चिकित्सालय के स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) में अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच 80 नवजात शिशुओं की मौत का मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हलचल तेज हो गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. पंकज दुबे ने चार सदस्यीय जांच दल गठित किया है। दल को नवजातों की मृत्यु के कारणों की गहन समीक्षा करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक सुधारात्मक उपाय सुझाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

जानकारी के अनुसार, बीते दिनों सिवनी विधायक दिनेश राय मुनमुन ने जिला अस्पताल का औचक निरीक्षण किया था। इस दौरान एसएनसीयू में तीन माह के भीतर 46 नवजातों की मौत की जानकारी सामने आने पर उन्होंने नाराजगी जाहिर की थी। इसके बाद विभागीय स्तर पर मामले की पड़ताल तेज हुई। जांच दल में मेडिकल कॉलेज के सहायक प्राध्यापक एवं शिशु रोग विभागाध्यक्ष डॉ. गौरव प्रजापति सहित तीन अन्य चिकित्सकों को शामिल किया गया है।

1,088 नवजात भर्ती, 80 की मौत

विभागीय जांच प्रतिवेदन के मुताबिक, 13 अप्रैल से 30 सितंबर 2026 तक एसएनसीयू में कुल 1,088 नवजात भर्ती किए गए, जिनमें 80 की मृत्यु दर्ज हुई। इसी अवधि में जिला अस्पताल में कुल 3,793 प्रसव हुए। इनमें 1,824 सामान्य और 1,969 सीजेरियन प्रसव शामिल हैं।

चिकित्सकीय अभिलेखों के अनुसार, मृत नवजातों में कम जन्म वजन, समयपूर्व जन्म और श्वसन संबंधी गंभीर समस्याएं प्रमुख कारणों में शामिल थीं। रिपोर्ट में बताया गया है कि मृत नवजातों में 60 का वजन सामान्य से कम था, जबकि 44 नवजातों का जन्म के समय वजन 400 से 1,500 ग्राम के बीच था। कुछ शिशुओं को निजी नर्सिंग होम और अन्य शासकीय स्वास्थ्य संस्थानों से गंभीर अवस्था में रेफर किया गया था।

पिछले वर्षों के आंकड़े भी आए सामने

स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2020-21 में एसएनसीयू में 2,137 नवजात भर्ती हुए और 279 की मृत्यु हुई थी। वर्ष 2023-24 में 2,019 भर्ती नवजातों में 118 की मृत्यु दर्ज की गई। वर्ष 2024-25 में 1,815 भर्ती नवजातों में 108 तथा वर्ष 2025-26 में 1,937 भर्ती नवजातों में 129 की मौत हुई। वहीं, वर्ष 2026-27 में अब तक 1,088 भर्ती नवजातों में 80 की मृत्यु दर्ज की गई है।

व्यवस्थाओं में सुधार पर जोर

जांच में ड्यूटी रोस्टर का पालन, नवजातों की मौत की नियमित समीक्षा, मृत्यु के 48 घंटे के भीतर डेथ ऑडिट, चिकित्सा उपकरणों का तकनीकी परीक्षण और एसएनसीयू पोर्टल पर आंकड़ों की निगरानी जैसे बिंदुओं पर सुधार की जरूरत बताई गई है। अब जांच दल की समीक्षा और स्वास्थ्य विभाग की आगामी कार्रवाई पर नजर रहेगी।

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