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यश भारत ग्राउंड रिपोर्ट : सिर पर लटकता काल, हाथ में किताब: सरिया निकली छत के नीचे भविष्य गढ़ने को मजबूर नौनिहाल, ​18 साल में ही खंडहर बना स्कूल

डिण्डौरी l जिले के जनपद शिक्षा केन्द्र अमरपुर क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत झरना घुघरी के वन ग्राम भुरखाटोला में स्थित नवीन प्राथमिक शाला की हालत देखकर शिक्षा विभाग के तमाम दावों की पोल खुल जाती है। स्कूल भवन पूरी तरह से जर्जर हो चुका है। तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि क्लासरूम की छत का प्लास्टर जगह-जगह से उखड़ गया है और लोहे की सरिया बाहर निकल आई है। खिड़की-दरवाजे टूटे-फूटे हैं, छत जर्जर है। कभी भी बड़ा हादसा होने की आशंका बनी हुई है।

 

जानकारी के अनुसार इस शाला की स्थापना वर्ष 2004 में हुई थी और भवन का निर्माण सर्व शिक्षा अभियान के तहत वर्ष 2006-07 में 2.90 लाख रुपये की लागत से पालक शिक्षक संघ द्वारा कराया गया था, जो महज 18 साल में ही खंडहर में तब्दील हो गया है।

शाला में 18 छात्र और दो शिक्षक पदस्थ

नवीन प्राथमिक शाला में कुल दर्ज संख्या 18 है। यहां तेजसिंह मरावी और कुंवारियां मरावी दो शिक्षक पदस्थ हैं। रिश्ते में दोनों पति-पत्नी हैं। शिक्षक अपनी तरफ से बच्चों को पूरी मेहनत से पढ़ा रहे हैं, बच्चों के रहन-सहन और संस्कार से उनकी मेहनत साफ दिखती भी है, लेकिन मूलभूत सुविधाओं के अभाव में सब बेकार है। बच्चों की शिक्षा-दीक्षा जर्जर भवन में चल रही है, उनका भविष्य खतरे से खाली नहीं है। शिक्षकों ने बताया कि भवन की जर्जर हालत की जानकारी कई बार विभाग को दी जा चुकी है, लेकिन आज तक कोई व्यवस्था नहीं हुई। भवन के नीचे बच्चों को बैठाने में हमेशा भय बना रहता है।

शाला में मध्यान्ह भोजन में भी भारी अनियमितता सामने आई है। शासन के नियमानुसार बच्चों को तय मीनू के अनुसार भोजन मिलना चाहिए, लेकिन यहां रोजाना सिर्फ दाल-चावल परोसा जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि भोजन आज भी लकड़ी के चूल्हे पर बनाया जा रहा है, जबकि शासन द्वारा गैस कनेक्शन और गैस से भोजन बनाने के लिए राशि दी जाती है। जिम्मेदार विभागीय अफसरों के पास समय का अभाव बना रहता है, कभी भ्रमण करते भी हैं या नहीं, या जानबूझकर शासकीय मापदंड का पालन कराने में उदासीनता दिखा रहे हैं।

ना पेयजल, ना सड़क

भुरखाटोला में शिक्षा के साथ-साथ मूलभूत सुविधाओं का भी टोटा है। ग्रामीणों को आज भी पीने के पानी और गांव तक पहुंचने के लिए पक्की सड़क तक नसीब नहीं है। ग्रामीणों ने सड़क और पीने के पानी को लेकर शासन-प्रशासन से अनेकों बार गुहार लगाई है। इतना ही नहीं, ग्रामीणों ने चुनाव बहिष्कार से लेकर सड़क जाम और धरना-प्रदर्शन भी किया, लेकिन सिर्फ आश्वासन ही मिला है, जिससे ग्रामीणों में आक्रोश देखने को मिल रहा है। सवाल यह है कि जब भवन इतना जर्जर है तो विभाग किस बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? क्या किसी बच्चे के साथ अनहोनी के बाद ही प्रशासन की नींद टूटेगी? मामले को लेकर खंड शिक्षा अधिकारी अमरपुर से मोबाइल पर संपर्क किया गया, फोन ना उठाने से जानकारी नहीं मिल सकी।

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