मप्र कैबिनेट के बड़े फैसले: 23,288 करोड़ के विकास कार्यों को मंजूरी, 15 नए सैटेलाइट टाउन होंगे विकसित

मप्र कैबिनेट के बड़े फैसले: 23,288 करोड़ के विकास कार्यों को मंजूरी, 15 नए सैटेलाइट टाउन होंगे विकसित
भोपाल,यशभारत। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में प्रदेश के विकास को गति देने वाले कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। कैबिनेट ने 23,288 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों की निरंतरता को मंजूरी दी है। साथ ही, शहरों पर बढ़ते दबाव को कम करने और आसपास के क्षेत्रों में बेहतर शहरी सुविधाएं देने के लिए 15 नए सैटेलाइट टाउन विकसित करने का बड़ा फैसला लिया गया है।
बैठक के प्रमुख बिंदु
धान पंजीयन की तिथि बढ़ी: किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए धान उपार्जन के लिए पंजीयन की अंतिम तिथि बढ़ाकर 4 नवंबर कर दी गई है।
निःशुल्क संपत्ति रजिस्ट्री का लक्ष्य: प्रधानमंत्री स्वामित्व योजना के तहत अब तक करीब 15 लाख ग्रामीणों की निःशुल्क रजिस्ट्रियां हो चुकी हैं। सरकार ने 15 नवंबर तक 20 लाख रजिस्ट्रियां पूरी करने का लक्ष्य रखा है, जिससे लगभग 60 लाख लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि जिन गांवों में शत-प्रतिशत रजिस्ट्रियां हो चुकी हैं, वहां धनतेरस पर दीपोत्सव मनाया जाए।
गांधी सागर में डेस्टिनेशन कैबिनेट: राज्य सरकार की अगली कैबिनेट बैठक आगामी 18 नवंबर को गांधी सागर में होगी। इसमें कृषि और औद्योगिक विकास से जुड़े मुद्दों पर विशेष फोकस रहेगा।
भगवान बिरसा मुंडा जयंती: जननायक बिरसा मुंडा की जयंती 15 नवंबर को प्रदेश में तीन स्थानों पर भव्य रूप से मनाई जाएगी। इसकी तैयारियों को लेकर 5 नवंबर को मुख्यमंत्री निवास पर उच्चस्तरीय बैठक होगी।
बोमा पद्धति से शिफ्ट होंगे 2 हजार नीलगाय और हिरण, अफ्रीका के विशेषज्ञों ने दी है ट्रेनिंग
किसानों की फसलों को नीलगाय और वन्यजीवों (हिरण) से होने वाले भारी नुकसान को रोकने के लिए राज्य सरकार ने एक अनूठी पहल की है। कैबिनेट बैठक में लिए गए निर्णय के तहत, किसानों की सुगमता के लिए बोमा पद्धति का उपयोग करके लगभग 2,000 नीलगाय और हिरणों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया गया है।
क्या है बोमा पद्धति?
वन्यजीवों को सुरक्षित पकड़कर दूसरी जगह स्थानांतरित करने की इस अफ्रीकी तकनीक में जानवरों को बिना कोई नुकसान पहुँचाए एक घेरे के माध्यम से सुरक्षित वाहनों में चढ़ाया जाता है। सरकार ने इस आधुनिक तकनीक के लिए विशेष रूप से अफ्रीकी विशेषज्ञों से ट्रेनिंग ली है।







