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भारत का महापर्व दीपावली 8 नवंबर को दीपावली केवल एक दिन का त्योहार नहीं, पांच दिनों का महापर्व है – ज्योतिषाचार्य पं. लोकेश व्यास

अरुणोदय पंचांग के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित लोकेश व्यास ने बताए धनतेरस से भाई दूज तक के शुभ मुहूर्त और पौराणिक रहस्य

जबलपुर , यश भारत।पंडित  दीपावली को लेकर जनमानस में अक्सर भ्रम रहता है कि यह केवल एक दिन का पर्व है। इस भ्रम को दूर करते हुए अरुणोदय पंचांग के प्रसिद्ध, प्रख्यात ज्योतिषाचार्य पंडित लोकेश व्यास जी ने बताया कि दीपावली सनातन धर्म का सबसे बड़ा और प्रमुख महापर्व है जो पांच दिनों तक मनाया जाता है।

पंडित  व्यास जी के अनुसार दीपावली के 5 दिन:

1. धनतेरस (6 नवम्बर, शुक्रवार) -* इस दिन 10 बजकर 46 मिनट से शुभ मुहूर्त रहेगा। भगवान धन्वंतरि और कुबेर देव की पूजा के साथ सोना, चांदी, जेवर, बर्तन और झाड़ू खरीदना अक्षय फलदायी होता है। सायंकाल धन लक्ष्मी पूजन होता है। इसी दिन अकाल मृत्यु निवारण हेतु यम दीपदान का विशेष महत्व है। घर के बाहर चार बत्तियों वाला तेल का दीपक यमराज के निमित्त रखना चाहिए।

2. नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली) – यमराज के नाम का दीया निकाला जाता है। रूप चौदस के रूप में सौंदर्य और स्वच्छता पर ध्यान दिया जाता है।

3. दीपावली (8 नवम्बर, रविवार) -*मुख्य पर्व। प्रदोष व्यापिनी अमावस्या में लक्ष्मी पूजन शास्त्र सम्मत है। इस वर्ष दिन 10:13 से पूजन मुहूर्त प्रारंभ होकर पूरी रात चलेगा।

व्यापारियों के लिए दोपहर 1:30 से 3:15 तक स्थिर लग्न

शाम 6 से रात 8:10 तक स्थिर वृषभ लग्न का उत्तम मुहूर्त और रात 10:10 से 12:35 तक निशीथ काल तांत्रिक जप के लिए विशेष शुभ रहेगा।

4. गोवर्धन पूजा (अन्नकूट) – भगवान श्रीकृष्ण द्वारा इंद्र का मानमर्दन कर गोवर्धन पर्वत उंगली पर उठाने की लीला की याद में प्रकृति और गायों की पूजा।

5. भाई दूज (यम द्वितीया) – भाई-बहन के पवित्र प्रेम का प्रतीक। बहनें भाई के माथे पर तिलक कर लंबी उम्र की कामना करती हैं।

पौराणिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए पं. व्यास जी ने बताया:

श्रीराम आगमन: त्रेतायुग में भगवान श्रीराम, सीता और लक्ष्मण 14 वर्ष वनवास और रावण वध के बाद इसी दिन अयोध्या लौटे थे। अयोध्यावासियों ने घी के दीयों से पूरी नगरी रोशन की थी।
माता लक्ष्मी प्राकट्य: समुद्र मंथन के दौरान कार्तिक अमावस्या को ही धन और समृद्धि की देवी माता लक्ष्मी का प्राकट्य हुआ था। कृष्ण विजय: द्वापर में भगवान कृष्ण ने नरकासुर राक्षस का वध कर प्रजा को उसके आतंक से मुक्ति दिलाई थी। धन लक्ष्मी प्राप्ति मंत्र:पं. व्यास जी ने बताया कि ॥ ॐ ह्रीं महालक्ष्म्यै च विद्महे, विष्णुपत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी: प्रचोदयात्॥ मंत्र का जाप, खीर, पंचामृत, कमलगट्टा, वैजयन्ती से हवन और श्रीसूक्त पाठ करने से लक्ष्मी प्राप्ति होती है।

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