सिवनी के छोटे गांव से लाल किले तक पहुंचा पत्रकार सलीम का सफर, डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम रत्न पुरस्कार से हुए सम्मानित
कभी साइकिल से घर-घर अखबार पहुंचाते थे सलीम रेहमान, मुंबई से लेकर दुबई तक पत्रकारिता में बनाई पहचान

जबलपुर , यश भारत । मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के एक छोटे से गांव गोपालगंज से शुरू हुआ संघर्ष और मेहनत का सफर आज दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले तक पहुंच गया है। गांव की गलियों में साइकिल से अखबार बेचने वाले सलीम रेहमान को डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। उनकी इस उपलब्धि ने न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे सिवनी जिले और मध्य प्रदेश को गौरवान्वित किया है। सलीम रेहमान की कहानी किसी बड़े शहर की सुविधाओं या संसाधनों से शुरू नहीं हुई। उनका ताल्लुक सिवनी जिले के छोटे से गांव गोपालगंज से है। शुरुआती दिनों में उन्होंने साइकिल पर घूम-घूमकर अखबार बेचने का काम किया। इसी दौरान समाचारों और पत्रकारिता के प्रति उनकी रुचि बढ़ी और उन्होंने धीरे-धीरे लिखना शुरू किया। यहीं से उनके पत्रकारिता के सफर की नींव पड़ी। सीमित संसाधनों के बावजूद आगे बढ़ने का उनका जुनून उन्हें एक शहर से दूसरे शहर और फिर देश की सीमाओं के पार ले गया।

सलीम ने अपने पत्रकारिता करियर में सिवनी से शुरुआत की और फिर नागपुर तथा मुंबई में अपनी पहचान बनाई। इसके बाद उनका सफर संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) तक पहुंचा, जहां वे वर्तमान में पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। मुंबई और दुबई में भी उन्हें कई पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले में आयोजित सम्मान समारोह में उन्हें डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम रत्न पुरस्कार प्रदान किया गया। कार्यक्रम में कई विशिष्ट अतिथि और गणमान्य हस्तियां मौजूद रहीं। इनमें यूएई के शाही परिवार के वरिष्ठ सलाहकार एवं ट्रस्ट इन ट्रेड के सीईओ डॉ. अर्शी अयूब जवेरी, डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के भतीजे और हाउस ऑफ कलाम, रामेश्वरम के सचिव एपीजेएम जैनुलाबुद्दीन प्रमुख रूप से शामिल रहे।
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समारोह में पुरस्कार की संस्थापक सोनिया मेयर्स तथा डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के परिवार से जुड़े एपीजेएम शेख सलीम की भी विशेष उपस्थिति रही। सोनिया मेयर्स डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम पुरस्कार, मेड इन इंडिया स्वदेशी रनवे एवं आईएमएफएल इंस्टीट्यूट की संस्थापक हैं। वहीं, एपीजेएम शेख सलीम हाउस ऑफ कलाम, रामेश्वरम के सह-संस्थापक हैं। सलीम रेहमान का पारिवारिक जुड़ाव भी पत्रकारिता से रहा है। वे सिवनी के वरिष्ठ पत्रकार एम. रहमान के छोटे भाई मौलाना अलीम रेहमान के पुत्र हैं। ऐसे माहौल में उन्होंने पत्रकारिता की बारीकियों को समझा और अपने दम पर आगे बढ़ने का रास्ता चुना।







