भोपाल एम्स में दुर्लभ बीमारियों पर राष्ट्रीय कार्यशाला, बेहतर निदान और उपचार को लेकर बनी रणनीति स्वास्थ्यकर्मियों में जागरूकता बढ़ाने पर जोर, बहुविषयक इलाज और समय पर पहचान को बनाया केंद्र

भोपाल एम्स में दुर्लभ बीमारियों पर राष्ट्रीय कार्यशाला, बेहतर निदान और उपचार को लेकर बनी रणनीति
स्वास्थ्यकर्मियों में जागरूकता बढ़ाने पर जोर, बहुविषयक इलाज और समय पर पहचान को बनाया केंद्र
भोपाल यश भारत। राजधानी स्थित एम्स भोपाल में दुर्लभ बीमारियों रेयर डिजीज को लेकर एक महत्वपूर्ण जागरूकता एवं संवेदन शीलता कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर दुर्लभ रोगों के प्रबंधन को मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ी रणनीतिक पहल के रूप में सामने आई है। कार्यशाला का आयोजन एम्स भोपाल के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर रेयर डिजीज द्वारा मिनिस्ट्री आफ हेल्थ एंड फेमिली वेलफेयर के सहयोग से किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य स्वास्थ्यकर्मियों में दुर्लभ रोगों के प्रति जागरूकता बढ़ाना समय पर और सटीक निदान सुनिश्चित करना तथा बहुविषयक उपचार प्रणाली को सशक्त बनाना रहा। निदान और उपचार पर विशेष फोकस कार्यशाला में विशेषज्ञों ने बताया कि दुर्लभ बीमारियों की पहचान अक्सर देर से होती है जिससे मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता। ऐसे में प्राथमिक स्तर पर ही लक्षणों की पहचान और रेफरल सिस्टम को मजबूत करना बेहद जरूरी है। विशेषज्ञों ने आधुनिक तकनीकों और शोध आधारित उपचार पद्धतियों को अपनाने पर जोर दिया। बहुविषयक दृष्टिकोण की जरूरत कार्यक्रम में यह भी रेखांकित किया गया कि दुर्लभ बीमारियों के इलाज के लिए केवल एक विभाग नहीं बल्कि कई विशेषज्ञों जैसे जेनेटिक्स, न्यूरोलॉजी, बाल रोग और अन्य चिकित्सा शाखाओं का समन्वय आवश्यक है। इस दिशा में एम्स भोपाल का सेंटर ऑफ एक्सीलेंस अहम भूमिका निभा रहा है। नीतिगत स्तर पर भी महत्वपूर्ण पहल कार्यशाला को नीति निर्माण और क्रियान्वयन के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे राज्य और देशभर में दुर्लभ रोगों के लिए एक प्रभावी स्वास्थ्य ढांचा विकसित करने में मदद मिलेगी।
एम्स भोपाल में आयोजित यह कार्यशाला न केवल चिकित्सा क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण पहल है बल्कि इससे हजारों ऐसे मरीजों को उम्मीद मिलेगी जो अब तक दुर्लभ बीमारियों के कारण उचित इलाज से वंचित रहे हैं।







