मध्यप्रदेश ने किया नज़रअंदाज़ तो पंजाब ने दिया मौका, अब फीफा की नज़र में आई .. नई दिल्ली में फीफा विशेषज्ञों ने सराहा फुटबॉल खिलाड़ी चेतना जायसवाल के खेल को

मध्यप्रदेश ने किया नज़रअंदाज़ तो पंजाब ने दिया मौका, अब फीफा की नज़र में आई
.. नई दिल्ली में फीफा विशेषज्ञों ने सराहा फुटबॉल खिलाड़ी चेतना जायसवाल के खेल को


आशीष दीक्षित, भोपाल। प्रतिभा को कभी दबाया नहीं जा सकता, इसका जीता जागता उदाहरण हैं उभरती महिला फुटबॉल खिलाड़ी चेतना जायसवाल। मध्यप्रदेश में वर्षों तक संघर्ष करने के बावजूद जब चेतना को उचित अवसर नहीं मिला तो उसने पंजाब के अमृतसर में स्थित गुरुनानक देव विश्वविद्यालय में चयन प्रक्रिया में हिस्सा लिया। यहां खेल अधिकारियों ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और राष्ट्रीय स्तर पर खेलने का मौका दिया। चेतना पंजाब की ओर से खेलते राष्ट्रीय प्रतियोगिता में खेल चुकी है। अब चेतना पर फुटबाल की सबसे बड़ी संस्था फीफा यानि फेडरेशन इंटरनेशल डी फुटबाॅल एसोसिएशन की नजर पड़ी है।
चेतना के खेल को सराहा
दिल्ली में फीफा विशेषज्ञों मौजूदगी में चेतना के खेल को सराहा गया वा उसका सम्मान भी किया गया। इस दौरान एआईएफएफ के उप महासचिव एम सत्यनारायण, फीफा विशेशज्ञ साइमन टोसेली, नचा तरातेरार्सन और पेमा त्शेरिंग मौजूद रहे। इनके अलावा एआईएफएफ महिला समिति सदस्य शबाना रब्बानी व भारतीय खिलाड़ी व कोच मौजूद रहे। चेतना अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी अपनी छाप छोड़ने जा रही हैं और फीफा की नज़र उन पर टिकी हुई है।
आसान नहीं था सफर
खिलाड़ी का सफर आसान नहीं रहा। इस प्रतिभाशाली फुटबॉलर ने बचपन से ही खेल के प्रति जुनून दिखाया। पिता के निधन के बाद मां और भाई ने आत्मबल बढ़ाया और खेल मैदान पर पहुंचाया। चेतना के कोच कमल ठाकुर ने बताया कि मैदान में चेतना का प्रदर्शन हमेशा प्रभावशाली रहा, लेकिन प्रदेश स्तर पर चयन की राजनीति और उदासीन रवैये के चलते उन्हें टीम से बाहर रखा जाता रहा। कई बार चयन ट्रायल्स में बेहतर प्रदर्शन करने के बावजूद उन्हें अवसर नहीं दिया गया। इससे निराश होकर उन्होंने प्रदेश बदलने का निर्णय लिया।
गुरुनानक देव यूनिर्वसिटी ने दिया अवसर
चेतना की मां पुष्पा जायसवाल ने यशभारत से चर्चा में बताया कि मध्यप्रदेश में बेहतर प्रदर्शन करने के बाद उसे मौका नहीं मिल रहा था। गुरुनानक देव यूनिर्वसिटी अमृतसर में मौका मिला। वहां के खेल अधिकारियों ने जब उनकी मेहनत और प्रतिभा देखी तो बिना देर किए उन्हें विश्विध्यालय की टीम व उसके बाद राज्य टीम में शामिल किया। राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उन्होंने अपने शानदार खेल से सबका ध्यान आकर्षित किया। हाल ही में हुए इंटर स्टेट टूर्नामेंट में उनके प्रदर्शन ने खेल विशेषज्ञों और चयनकर्ताओं को चौंका दिया।
फीफा की टिकी निगाहें
तेज़ रफ्तार, शानदार ड्रिब्लिंग और सटीक गोल करने की क्षमता उनकी सबसे बड़ी ताकत है। चेतना के फुटबाॅल के खेल कौशल को देखते हुए अब फीफा की निगाहें भी उन पर टिक गई हैं। सूत्रों के अनुसार फीफा के स्काउट्स ने उनके खेल का वीडियो देखकर उन्हें आगामी कैंप में शामिल करने पर विचार किया है। यह कदम न केवल उनके करियर के लिए सुनहरा अवसर हैए बल्कि देश के लिए भी गौरव का विषय होगा।
मप्र खेल प्रबंधन को सीख लेनी चाहिए
खेल विशेषज्ञ मानते हैं कि यह प्रकरण प्रदेश खेल प्रबंधन के लिए सीख है। यदि स्थानीय खिलाड़ियों को सही अवसर और प्रोत्साहन नहीं मिलेगा तो वे अन्य राज्यों का रुख करेंगे और प्रदेश प्रतिभा खो देगा। खेलप्रेमियों का कहना है कि सरकार और खेल संघों को चयन प्रक्रिया पारदर्शी करनी चाहिए और खिलाड़ियों की मेहनत को सम्मान देना चाहिए।
देश का नाम रोशन करना है
मैंने कभी हार नहीं मानी। जब मध्यप्रदेश में मौका नहीं मिला तो बहुत दुख हुआ, लेकिन मैंने खेलना बंद नहीं किया। पंजाब ने मुझे अपनाया और अब मैं यहां से देश का नाम रोशन करना चाहती हूं।
.. चेतना जायसवाल, फुटबॉल खिलाड़ी







