पिछली लूट से नहीं लिया सबक, अंतर-जिला मिलिंग फिर शुरू
जबलपुर की धान अब बालाघाट में होगी प्रोसेस

जबलपुर,यश भारत। अंतर-जिला मिलिंग को लेकर पिछले वर्षों में हुए बड़े गोलमाल के बावजूद एक बार फिर नागरिक आपूर्ति निगम मुख्यालय ने धान को बालाघाट भेजने के आदेश जारी कर दिए हैं। जबलपुर जिले के विभिन्न वेयरहाउसों में लगभग 17 लाख क्विंटल धान भंडारित है, जिसकी मिलिंग के लिए अब 185 किलोमीटर तक के परिवहन शुल्क का भुगतान करते हुए बालाघाट जिले की राइस मिलों को धान आवंटित किया जाएगा।
गौरतलब है कि पिछले साल भी अंतर-जिला धान परिवहन में बड़ा घोटाला उजागर हुआ था, जिसमें कार और मोटरसाइकिल पर करोड़ों का परिवहन दिखाया गया था। इस प्रकरण में दर्जनों लोगों पर मामला दर्ज हुआ था और कई अधिकारी जेल पहुंच चुके थे। इसके बावजूद एक बार फिर मुख्यालय ने अंतर-जिला मिलिंग की अनुमति दे दी है, जबकि जबलपुर के ही 45 राइस मिलर कानूनी प्रकरणों में फंसे हुए हैं, जिन पर अब तक कोई निर्णय नहीं हुआ है।
कहां तक पहुंचेगी धान?
यश भारत द्वारा पिछले अंक में प्रकाशित समाचार में आशंका जताई गई थी कि उपार्जन के दौरान धान की मिलिंग अन्य जिलों में होने से रीसाइकलिंग की संभावना बढ़ जाती है। अब जब बालाघाट में मिलिंग शुरू कराई जा रही है, यह आशंका और गंभीर हो गई है। अब देखने वाली बात यह होगी कि जबलपुर की धान जबलपुर में ही बिक जाती है या वाकई बालाघाट में मिलिंग के लिए पहुंचती है।
ओवरलोड नियमों का हो कड़ाई से पालन
धान परिवहन को लेकर नागरिक आपूर्ति निगम और भारतीय खाद्य निगम के स्पष्ट निर्देश हैं कि परिवहन के दौरान किसी भी तरह का ओवरलोड नहीं किया जा सकता। यदि ओवरलोडिंग पाई जाती है तो परिवहन का भुगतान नहीं किया जाएगा। यही नियम चावल के भंडारण, रैक लोडिंग और अनलोडिंग पर भी लागू होते हैं। लेकिन पूर्व में इन नियमों को नजरअंदाज कर के परिवहनकर्ताओं को भुगतान किया जाता रहा है। इस बार जबकि निगम 185 किलोमीटर तक का भुगतान कर रहा है, अंडरलोड व ओवरलोड नियमों का सख्ती से पालन आवश्यक है।वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन को भी सुनिश्चित करना चाहिए कि वाहन की क्षमता के अनुसार ही गेट पास बनाये । यदि क्षमता से अधिक माल भेजा जाता है, तो जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए।






