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खितौला बैंक डकैती : न मिला सोना न मिला धन

जल्दबाजी पुलिस के बनी मुसीबत, मुख्य फरार

जबलपुर यश भारत। सिहोरा की खितौला में 11 अगस्त को हुई इसाफ स्मॉल फाइनेंस बैंक में 15 करोड़ की सनसनीखेज वारदात में पुलिस ने हड़बड़ी में घटना का खुलासा तो कर दिया लेकिन पुलिस की थ्योरी लोगों के गले नहीं उतर रही है। पुलिस दिन चार आरोपियों की गिरफ्तार करने की बात करके एक को घटना का मास्टरमाइंड बता रही है सही मायने में उसको पुलिस के पास से कुछ विशेष हासिल हुआ ही नहीं है यदि पुलिस के द्वारा साझा की गई जानकारी को ही सही मान लिया जाए तो सवाल यह उठता है कि यदि वाकई रहीस लोधी घटना का मास्टरमाइंड है तो फिर उसके पास से मात्र 183000 की राशि जप्त होना खुद अपने आप में एक बड़ा सवाल पैदा करती है। यदि यह वाकई में मास्टरमाइंड है तो इतना बेवकूफ भी नहीं होगा की 15 करोड़ का माल दूसरे के हवाले कर दे और ₹200000 लेकर बैठ जाए। इसके अलावा पुलिस ने जो तीनों और आरोपी गिरफ्तार किये है वह भी मददगार से ज्यादा कुछ नहीं है सही आरोपी तो अभी भी पुलिस की पकड़ से दूर है और माल भी उन्हीं के पास है क्योंकि सोने के नाम पर पुलिस ने अब तक कुछ भी बरामद नहीं किया है। अब 14 किलो 875 ग्राम सोना जमीन निकल गई या आसमान खा गया यह अपने आप में बड़ा सवाल पैदा करता है। जिन चारों आरोपियों के नाम पुलिस ने साझा किए हैं उनमें पाटन निवासी रईस लोधी इंद्राना का सोनू बर्मन उडना का हेमराज सिंह और दमोह का विकास चक्रवर्ती बताया जा रहा है। अब ना आरोपियों की बात करें तो तीन तो जबलपुर और इसके आसपास की ही हैं जबकि चौथा पड़ोसी जिला दमोह का रहने वाला है। ऐसी में बाकी आरोपी कहां गए और इतनी आरोपी गिरफ्तार करने के बाद भी पुलिस अब तक इन तक क्यों नहीं पहुंच पाई यह भी पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगाता है।

जल्द पकड़ लिए जाएंगे माल भी हो जाएगा बरामद

चार आरोपियों की गिरफ्तारी का खुलासा करने के बाद पुलिस का यह दावा भी है कि बाकी आरोपियों की तलाश में पुलिस की पांच टीम में अलग-अलग स्थान पर दबिश देने गई है और जल्द ही गिरफ्तारी भी हो जाएगी और माल भी बरामद कर लिया जाएगा प्रायः हर बड़ी घटना के बाद पुलिस इस तरह के दावा करती रहती है लेकिन पूर्व में हुई कई घटनाएं ऐसी हैं जिनमे ऐसे दावों की कलई भी खुलती रही है।

इसलिए हड़बड़ी में थी पुलिस

अब बात की जाए पुलिस के खुलासे की तो जिले के अभी तक के इतिहास में हुई डकैती की इस सबसे बड़ी घटना को लेकर पुलिस पर काफी प्रेशर था इसके अलावा मीडिया भी लगातार सूत्रों के हवाले से नित नये अपडेट भी प्रकाशित कर रहा था। जिससे पुलिस की काफी छीछालेदर हो रही थी और वरिष्ठ अधिकारियों का दबाव भी था क्योंकि खुद आईजी डीआईजी तक मौके पर पहुंच गए थे और उनके द्वारा भी लगातार आरोपियों की खोज खबर लेने का दबाव पुलिस पर था इसीलिए इस सबसे बचने के लिए पुलिस को आनन फानन में एक ही रास्ता सूझा कि फिलहाल जो लोग हाथ लगे हैं उन्हें ही मास्टरमाइंड और आरोपी बताकर पहले तो मामले को शांत कर लिया जाए क्योंकि समस्या अच्छी तरह से जानती है की एक बार खुलासा होने के बाद लोग जल्दी भूलने की बीमारी से भी ग्रसित रहते है। आगे क्या करना है यह बाद में सोचा जाएगा।

04 12

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