मध्य प्रदेशराज्य

वसूली का खेल’? : पुलिस पर ट्रक ड्राइवर के गंभीर आरोप, बिना नेम प्लेट चेकिंग पर बवाल… देखें पूरा वीडियो

यशभारत डिंडोरी/बजाग।बजाग पुलिस की वाहन जांच और चालानी कार्रवाई एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। एक ट्रक चालक ने पुलिस पर अवैध वसूली, वर्दी पर बिना नेम प्लेट लगाए वाहन से जांच करने और दबाव बनाकर चालान काटने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। चालक के आरोप सामने आने के बाद वाहन जांच की प्रक्रिया और पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर प्रशासनिक स्तर पर भी सवाल उठने लगे हैं।

 

ट्रक चालक के मुताबिक, सड़क पर वाहन जांच के दौरान पुलिसकर्मियों की वर्दी में पर कथित तौर पर नेम प्लेट नहीं लगी थी। चालक का आरोप है कि जांच के दौरान पुलिस की पहचान और कार्रवाई की प्रक्रिया स्पष्ट नहीं थी। इसके बाद उस पर कथित रूप से दबाव बनाया गया और चालान काटने की कार्रवाई की गई।

आखिर किसके आदेश से हो रही वाहन जांच?

मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि बजाग क्षेत्र में इस तरह की वाहन जांच किस अधिकारी के आदेश पर और किस प्रक्रिया के तहत की जा रही है। यदि पुलिस द्वारा आधिकारिक रूप से वाहन जांच अभियान चलाया जा रहा है तो जांच में तैनात पुलिसकर्मियों की पहचान, वाहन की स्थिति और चालानी कार्रवाई की पूरी प्रक्रिया नियमों के अनुरूप होना जरूरी है।

 

ट्रक चालक के आरोपों ने पुलिस की वाहन जांच व्यवस्था की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह भी है कि क्या जांच के दौरान संबंधित पुलिसकर्मियों की पहचान स्पष्ट करने वाली नेम प्लेट अथवा अन्य निर्धारित पहचान मौजूद थी।

 

चालक ने जांच के दौरान कैमरे से रिकॉर्डिंग नहीं किए जाने को लेकर भी सवाल उठाए हैं। आरोप है कि यदि जांच और कार्रवाई कैमरे पर रिकॉर्ड नहीं की गई तो बाद में यह पता लगाना मुश्किल हो जाता है कि मौके पर वास्तव में क्या हुआ था।

 

वाहन जांच और चालानी कार्रवाई को लेकर लगातार पारदर्शिता की मांग उठती रही है। ऐसे में सवाल है कि यदि पुलिसकर्मियों के पास कार्रवाई की वीडियो रिकॉर्डिंग उपलब्ध हो तो आरोपों की सच्चाई आसानी से सामने लाई जा सकती है।

 

ट्रक चालक ने वाहन जांच की प्रक्रिया को लेकर हाईकोर्ट के आदेश की कथित अवहेलना का आरोप भी लगाया है। हालांकि, संबंधित आदेश इस मामले में किस तरह लागू होता है और उसका उल्लंघन हुआ है या नहीं, यह जांच का विषय है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है।

 

इसी वजह से पूरे मामले में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों द्वारा निष्पक्ष जांच कराना जरूरी माना जा रहा है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि वाहन जांच किसके निर्देश पर की गई, मौके पर कौन-कौन से पुलिसकर्मी मौजूद थे और चालानी कार्रवाई के दौरान निर्धारित प्रक्रिया का पालन हुआ या नहीं।

जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई कब?

 

मामले ने पुलिस की जवाबदेही को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। यदि ट्रक चालक के आरोप जांच में सही पाए जाते हैं तो संबंधित पुलिसकर्मियों की भूमिका की जांच के साथ-साथ उन अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय होना जरूरी है, जिनके अधीन वाहन जांच और चालानी कार्रवाई की जा रही थी।

 

वहीं यदि आरोप तथ्यहीन पाए जाते हैं तो पुलिस विभाग के पास जांच की वास्तविक स्थिति और पूरी कार्रवाई स्पष्ट करने का अवसर होगा। इससे वाहन चालकों के बीच भी पुलिस की कार्रवाई को लेकर विश्वास कायम किया जा सकेगा।

 

फिलहाल ट्रक चालक द्वारा लगाए गए आरोपों ने बजाग पुलिस की वाहन जांच व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर जांच किसके आदेश से हो रही थी? बिना नेम प्लेट लगाए पुलिसकर्मी से जांच क्यों की जा रही थी? कार्रवाई की वीडियोग्राफी क्यों नहीं हुई? और यदि नियमों का पालन नहीं हुआ तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब होगी? इन सवालों के जवाब अब वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की जांच और आधिकारिक पक्ष से ही सामने आ सकेंगे।

 

इनका कहना है….

मेरी गाड़ी जांच के लिए रोकी गई और कागज मांगा गया मेरे द्वारा वीडियो बनाने पर जबरदस्ती चालानी कार्रवाई बजाग थाना लाकर की गई और मैं पैसे नहीं देता हूं इसलिए मुझे हर बार परेशान किया जाता है |

अमित गुप्ता, ट्रक ड्राईवर

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