43 करोड़ की हेरा फेरी के एवज में जमा है 47 करोड़ स्टॉक की जांच सवालों के घेरे में, मिलर कह रहे हमारा करोड़ का धन सरकार के पास

43 करोड़ की हेरा फेरी के एवज में जमा है 47 करोड़
स्टॉक की जांच सवालों के घेरे में, मिलर कह रहे हमारा करोड़ का धन सरकार के पास
जबलपुर, यश भारत। मिलिंग को लेकर अब प्रशासन और राइस मिलर आमने-सामने आते दिख रहे हैं। एक तरफ जहां प्रशासनिक जांच में 43 करोड़ ₹200000 की हेरा फेरी सामने आ रही है वही रईस मिल्टन का कहना है कि हमारे पास पूरा स्टॉक होने के बाद भी हेरा फेरी की बात समझ के पड़े है साथ ही साथ राइस मिलों का कहना है कि जिस विधान की हेरा फेरी करने का आरोप लगाया जा रहा है उसके आवाज में शासन के पास हमारे 47 करोड़ 50 लाख के एफडीआई डिपाजिट है इसके अलावा करोड़ों रुपए का चावल उनके द्वारा शासन की गोदाम में जमा करवाया गया है यदि यह पूरी राशि जोड़ ली जाए तो यह 100 करोड़ से ऊपर की होगी उसके बाद भी उनके ऊपर 43 करोड़ के गवन का आरोप लगाया जा रहा है।
किसकी थी जिम्मेदारी
इस पूरे मामले में स्टॉक का एक बड़ा पेच फस रहा है, जिसमें मिलर स्टॉक पूरी होने की बात कह रहे हैं वही पर्दे के पीछे से जो जानकारी मिल रही है उसमें प्रभारी नान डीएम और फूड कंट्रोलर के ऊपर स्टॉक की रिपोर्ट में हेरा फेरी की बात रही जा रही है, लेकिन इसमें एक सवाल यह भी उठना है कि आखिर स्टॉक के वेरिफिकेशन के लिए जिम्मेदारी सिर्फ एक व्यक्ति को दी गई थी या फिर क्षेत्रीय एसडीएम के साथ-साथ वेयरहाउसिंग और सहकारिता के अधिकारियों को भी टीम में शामिल किया गया था। इस पूरे मामले में यदि स्टॉक वेरिफिकेशन को लेकर कहीं कोई असमंजस था तो फिर एफ आई आर करने में इतनी जल्दबाजी क्यों दिखाई गई और यदि स्टॉक प्रशासन की जांच में कम पाया गया है तो उसे एफ आई आर में मेंशन क्यों नहीं किया गया जिससे अपराध की प्रवृत्ति और भी गंभीर हो जाती।
6 की बाद में हुई थी जांच
स्टॉक को लेकर पहले जो रिपोर्ट भेजी गई थी उसमें 40 राइस मिल की जानकारी दी गई थी। इस में से 6 मिल बच गई थी जिसकी कुछ दिन पहले ही जांच की गई है। बर्तमान जांच उसी टीम के द्वारा की गई जिस टीम के द्वारा पूर्व में जांच की गई थी, यदि पहले भेजी गई 40 राइस मिल की जाच सवालों के घेरे में थी तो फिर प्रशासन को इन अधिकारियों को अलग करके दूसरे अधिकारियों से जांच करवानी चाहिए थी लेकिन बाद में अभी जांच में भी यही अधिकारी शामिल थे कि इस पूरे मामले में कहीं ना कहीं जबलपुर और भोपाल के बीच मत भेज बने हुए।
अब विभागीय जांच पर नजर
एक तरफ जहां 16 राइस मिलर पर मामला दर्ज हो गया है, वहीं शेष बचे राइस मिलर के खिलाफ विभागीय जांच शुरू करने की तैयारी हो गई है । जिसको लेकर आपूर्ति निगम के मैनेजिंग डायरेक्टर ने सभी जानकारियां बुलवाना शुरू कर दी है, वहीं दूसरी तरफ राइस मिलरो द्वारा मिलिंग का काम पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। भोपाल सूत्रों की माने तो खाद्य विभाग और नान मुख्यालय की प्राथमिकता समय पर मिलिंग करने की है, क्योंकि वर्तमान समय में शासन को धान के लिए करोड़ों रुपए का किराया हर माह देना पड़ रहा है साथ ही साथ केंद्रीय पूल में चावल जमा न होने के कारण वहां से भुगतान प्राप्त नहीं हो रहा है , जिससे करोड़ों रुपए का ब्याज नान के खाते से जा रहा है







