देश

स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप: 50 लाख के भुगतान के फेर में कुर्क होने की नौबत, कोलकाता की टीम पहुंची मुख्यालय

स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप: 50 लाख के भुगतान के फेर में कुर्क होने की नौबत, कोलकाता की टीम पहुंची मुख्यालय

​15 साल पुराना है कीटनाशक सप्लाई का मामला, 50 लाख का बिल ब्याज जुड़कर हुआ 5 करोड़; 80 वर्षीय बुजुर्ग मालिक पाई-पाई को मोहताज

भोपाल, यशभारत। मध्य प्रदेश के लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के राज्य मुख्यालय में गुरुवार को उस समय अभूतपूर्व और असहज स्थिति निर्मित हो गई, जब कोलकाता से आई एक तकनीकी व कानूनी टीम सीधे कुर्की की वारंट तामील कराने दफ्तर पहुंच गई। कोर्ट के सख्त आदेश के बाद हुई इस औचक कार्रवाई से पूरे मंत्रालय और विभागीय गलियारे में हड़कंप मच गया। मामला करीब 15 वर्ष पुराने एक व्यावसायिक भुगतान से जुड़ा है, जो महज 50 लाख रुपये का था, लेकिन सरकारी लेत-लेती और प्रशासनिक शिथिलता के चलते अब ब्याज सहित 5 करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर चुका है।

​सुप्रीम कोर्ट के आश्वासन के बाद भी नहीं मिली राशि
प्राप्त जानकारी के अनुसार, कोलकाता की प्रतिष्ठित प्रोपराइटरशिप कंपनी “नीतापुर इंडस्ट्रीज” ने वर्ष 2011 में तत्कालीन डायरेक्टर ऑफ हेल्थ सर्विसेज (स्वास्थ्य सेवा निदेशालय) को लगभग 50 लाख 70 हजार रुपये मूल्य के इंसेंटिसाइड (कीटनाशक) की सप्लाई की थी। नियमानुसार माल की आपूर्ति होने के बाद भी विभाग द्वारा भुगतान रोक दिया गया। इसके बाद पीड़ित पक्ष ने लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी। मामला पहले आर्बिट्रेशन (मध्यस्थता) में गया, जिसके बाद शासन ने इसके खिलाफ अपील की। अंततः यह कानूनी विवाद देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) तक पहुंचा। करीब एक वर्ष पूर्व राज्य शासन ने माननीय न्यायालय से समय मांगते हुए जल्द से जल्द भुगतान करने का लिखित आश्वासन दिया था, परंतु समयावधि बीत जाने के बाद भी बजट और फाइलों के चक्कर में राशि जारी नहीं की जा सकी।

​हाईकोर्ट के आदेश पर वारंट लेकर पहुंचे प्रतिनिधि
शासन द्वारा वादे के मुताबिक भुगतान न किए जाने पर कंपनी ने पुनः जबलपुर हाईकोर्ट की शरण ली। तमाम कानूनी औपचारिकताओं और स्टांप ड्यूटी की प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए विभाग की संपत्ति कुर्क करने के आदेश जारी किए। कोलकाता से भोपाल पहुंचे कंपनी के मुख्य प्रतिनिधि पुनानसेश बुनिया ने बताया कि मूल राशि 50 लाख 70 हजार रुपये थी, लेकिन 15 साल का लंबा वक्त गुजरने के कारण इस पर कानूनी और कंपाउंडिंग इंटरेस्ट जुड़ता चला गया, जो अब लगभग 5 करोड़ रुपये हो चुका है।

​आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं बुजुर्ग मालिक
कंपनी प्रतिनिधि के अनुसार, नीतापुर इंडस्ट्रीज एक लघु एकल स्वामित्व (प्रोपराइटरशिप) फर्म है। इसके मुख्य मालिक की उम्र अब 80 वर्ष से अधिक हो चुकी है। जीवन के अंतिम पड़ाव पर अपनी ही मेहनत की गाढ़ी कमाई न मिलने के कारण बुजुर्ग मालिक गंभीर आर्थिक संकट और मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं। कोर्ट के स्पष्ट आदेशों के बावजूद विभाग लगातार टालमटोल की नीति अपनाता रहा, जिससे विवश होकर यह कठोर कदम उठाना पड़ा।

अधिकारियों के फूले हाथ-पांव, तलाशे जा रहे कानूनी रास्ते
गुरुवार दोपहर जैसे ही कोलकाता की टीम कुर्की के अदालती आदेशों के साथ दफ्तर के भीतर दाखिल हुई, वहां मौजूद अधिकारियों और कर्मचारियों में अफरा-तफरी मच गई। आनन-फानन में कानूनी सलाहकारों और वरिष्ठ अधिकारियों के बीच बैठकों का दौर शुरू हुआ, ताकि किसी तरह सरकारी संपत्ति की जब्ती की इस कार्रवाई को टाला जा सके। फिलहाल इस पूरे मामले पर स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई आधिकारिक लिखित वक्तव्य जारी नहीं किया गया है, लेकिन विधिक विशेषज्ञों से राय लेकर बीच का रास्ता निकालने की कवायद तेज हो गई है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button