कुंडली के ये 6 भाव तय करते हैं व्यक्ति कितना बनेगा धनवान
यश भारत प्राइम टाइम में ज्योतिषाचार्य मनोहर वर्मा ने समझाया धन योग का पूरा गणित

बोले – कर्म और किस्मत दोनों से बनता है पैसा
जबलपुर, यश भारत। “यश भारत प्राइम टाइम विथ आशीष शुक्ला के विशेष एपिसोड में इस बार चर्चा का विषय रहा – धन, किस्मत और कर्म का संबंध। कार्यक्रम में ज्योतिषाचार्य एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी मनोहर वर्मा ने विस्तार से बताया कि किसी व्यक्ति की कुंडली में कौन से योग यह तय करते हैं कि उसके पास कितना धन आएगा, कब आएगा और कितना संचय होगा।
कार्यक्रम की शुरुआत में एंकर आशीष शुक्ला ने कहा कि धन एक ऐसी आवश्यकता है, जिसकी जरूरत हर व्यक्ति को होती है। करोड़पति को करोड़ों कम लगते हैं तो आम आदमी को सैकड़ों की चिंता रहती है। इसी सवाल पर मनोहर वर्मा ने कहा कि ज्योतिष में धन को देखने की स्पष्ट व्यवस्था है और हर व्यक्ति की जन्म कुंडली यह संकेत देती है कि उसके जीवन में धन का प्रवाह कैसा रहेगा।
दूसरा और ग्यारहवां भाव सबसे अहम
मनोहर वर्मा ने बताया कि कुंडली का दूसरा भाव धन संचय का होता है, जबकि ग्यारहवां भाव लाभ और आय का संकेत देता है। यदि ग्यारहवां भाव मजबूत है तो व्यक्ति के पास धन आता है और यदि दूसरा भाव मजबूत है तो वह धन टिकता भी है। कई लोगों के पास पैसा तो आता है, लेकिन संचय नहीं हो पाता क्योंकि दूसरा भाव कमजोर होता है।
ऐसे बनता है शक्तिशाली धन का योग
उन्होंने बताया कि यदि दूसरे और ग्यारहवें भाव के स्वामी आपस में संबंध बना लें या पांचवें और नौवें भाव के साथ जुड़ जाएं तो कुंडली में शक्तिशाली धन योग बनता है। पहला, पांचवां और नौवां भाव लक्ष्मी स्थान माने जाते हैं, जबकि पहला, चौथा, सातवां और दसवां भाव विष्णु स्थान कहलाते हैं। जब इन भावों के स्वामी एक-दूसरे से जुड़ते हैं तो व्यक्ति के जीवन में धन और प्रतिष्ठा दोनों बढ़ती हैं।
मजबूत योग व्यक्ति को बेहद धनी बना सकते हैं
वर्मा ने कहा कि यदि दूसरे, पांचवें, नौवें और ग्यारहवें भाव के स्वामी एक साथ मजबूत स्थिति में आ जाएं तो व्यक्ति अत्यंत धनी बन सकता है। ऐसे योग व्यक्ति को व्यापार, उद्योग और बड़े आर्थिक अवसरों में सफलता दिलाते हैं। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि धन केवल भाग्य से नहीं बल्कि कर्म से भी जुड़ा हुआ है।
कर्म से बदल सकता है भाग्य
कार्यक्रम में आशीष शुक्ला ने सवाल किया कि लोग अक्सर कहते हैं लिखा होगा तो मिलेगा। इस पर मनोहर वर्मा ने कहा कि जन्म कुंडली व्यक्ति के प्रारब्ध को बताती है, लेकिन वर्तमान जीवन के कर्म भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। अच्छे कर्म और पुण्य व्यक्ति के धन योग को और मजबूत कर सकते हैं।
महादशा तय करती है धन आने का समय
मनोहर वर्मा ने बताया कि कुंडली में बने योग तभी फल देते हैं जब संबंधित ग्रहों की महादशा और अंतर्दशा चलती है। इसके अलावा D-11 चार्ट, श्री लग्न और इंदु लग्न जैसी विशेष ज्योतिषीय विधियों से भी व्यक्ति की आर्थिक स्थिति का विश्लेषण किया जाता है।
कार्यक्रम के अंत में मनोहर वर्मा ने कहा कि धन सीधे व्यक्ति के कर्म से जुड़ा हुआ है। यदि व्यक्ति निरंतर प्रयास करता है तो उसे कर्मफल के रूप में धन अवश्य प्राप्त होता है। वहीं आशीष शुक्ला ने निष्कर्ष देते हुए कहा कि किस्मत महत्वपूर्ण है, लेकिन कर्म के बिना धन का रास्ता अधूरा है।







