एम्स से बंसल अस्पताल तक बना ग्रीन कॉरिडोर, 15 मिनट में पहुंचा अंग

एम्स से बंसल अस्पताल तक बना ग्रीन कॉरिडोर, 15 मिनट में पहुंचा अंग भोपाल, यश भारत । मध्यप्रदेश में पहली बार एक ही अंगदाता से प्राप्त किडनी और लिवर का एक साथ अलग-अलग मरीजों में सफल प्रत्यारोपण किया गया। यह सफलता बंसल अस्पताल भोपाल में हासिल हुई। बैतूल निवासी 26 वर्षीय सुनील बोसमकर के ब्रेन-स्टेम डेड घोषित होने के बाद परिजनों ने उनकी दोनों किडनियां और लिवर दान करने का निर्णय लिया। अंगदान के इस फैसले से तीन जरूरतमंद मरीजों को नया जीवन मिलने का रास्ता खुला।
एम्स भोपाल में उपचार के दौरान सुनील बोसमकर को चिकित्सकों ने ब्रेन-स्टेम डेथ घोषित किया। इसके बाद उनके पिता जय सिंह बोसमकर और परिवार को उनकी स्थिति तथा ब्रेन-स्टेम डेथ की पूरी जानकारी देकर अंगदान के संबंध में परामर्श दिया गया। परिवार ने मानवीय पहल करते हुए दोनों किडनियां और लिवर दान करने की सहमति दी।
अंगदान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद सुनील की एक किडनी और लिवर को बंसल अस्पताल में भर्ती दो मरीजों के प्रत्यारोपण के लिए भेजा गया। अंगों को समय पर अस्पताल पहुंचाने के लिए रविवार दोपहर 1.29 बजे एम्स भोपाल से बंसल अस्पताल तक ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया। विशेष ट्रैफिक व्यवस्था के चलते एंबुलेंस महज 15 मिनट में अंगों को सुरक्षित लेकर बंसल अस्पताल पहुंची। इसके बाद चिकित्सकों की टीम ने दोनों अंगों का सफल प्रत्यारोपण किया।
सुनील की दूसरी किडनी का प्रत्यारोपण एम्स भोपाल में ही जरूरतमंद मरीज में किया गया। इस तरह एक ही अंगदाता के अंगों से तीन मरीजों को जीवनदान मिलने की उम्मीद जगी है।
ग्रीन कॉरिडोर के जरिए अंगों को कम से कम समय में अस्पताल पहुंचाया जाता है, क्योंकि प्रत्यारोपण के लिए अंगों को निर्धारित समयसीमा के भीतर सुरक्षित रूप से संबंधित अस्पताल तक पहुंचाना बेहद महत्वपूर्ण होता है। इस पूरी प्रक्रिया में एम्स भोपाल, बंसल अस्पताल, पुलिस और अन्य संबंधित टीमों के बीच बेहतर समन्वय रहा।
परिवार के फैसले ने पेश की मिसाल
सुनील बोसमकर के परिवार का अंगदान का निर्णय समाज के लिए प्रेरणादायक है। मृत्यु के बाद भी उनके अंगों से तीन लोगों को जीवन मिलने की संभावना ने अंगदान की महत्ता को एक बार फिर सामने ला दिया है।







