
जबलपुर/नई दिल्ली। मध्यप्रदेश लोक सेवा (अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण) संशोधन अधिनियम, 2019 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाले मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य सरकार के तर्कों से सहमति जताते हुए अंतिम सुनवाई की तारीख तय कर दी है। अदालत ने इस मामले को 23 सितंबर 2025 से ‘टॉप ऑफ द बोर्ड’ के तहत प्रतिदिन सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का आदेश दिया।
राज्य सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के.एम. नटराज और महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने अदालत को बताया कि उच्च न्यायालय द्वारा ओबीसी आरक्षण पर लगाए गए स्थगन आदेश के कारण नई भर्ती प्रक्रियाएं अटकी हुई हैं, जिससे गंभीर कठिनाइयां उत्पन्न हो रही हैं। सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जल्द से जल्द अंतिम सुनवाई का आग्रह किया।
सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य सरकार के तर्कों को स्वीकार करते हुए कहा कि जब अंतिम सुनवाई की तारीख महज एक माह बाद निर्धारित कर दी गई है, ऐसे में फिलहाल स्थगन आदेश हटाने से अभ्यर्थियों के बीच और अधिक अनिश्चितता पैदा हो सकती है। अदालत ने स्पष्ट किया कि अब यह मामला तय समयसीमा के भीतर प्रतिदिन सुना जाएगा, ताकि जल्द से जल्द अंतिम निर्णय हो सके।







