हवा में धूल, आंखों में जलन, बदलते मौसम ने बढ़ाई परेशानी
– कंजेक्टिवाइटिस के लक्षणों से अस्पतालों में पहुंच रहे मरीज, आंखों में लालिमा और पानी आने की शिकायतें बढ़ीं
– बिना सलाह आई ड्रॉप इस्तेमाल करने से बचने की डॉक्टरों ने दी हिदायत
यशभारत, भोपाल। मानसून की विदाई के बाद राजधानी की सड़कों पर उड़ती धूल अब लोगों की आंखों के लिए मुसीबत बनने लगी है। सड़कों पर जमा मिट्टी, निर्माण कार्यों से उठने वाले धूल के गुबार और मौसम में बदलाव के बीच आंखों में जलन, खुजली और लालिमा की शिकायतें सामने आ रही हैं। कंजेक्टिवाइटिस यानी आंख आने के लक्षणों से परेशान मरीज इलाज के लिए अस्पतालों की नेत्र रोग ओपीडी पहुंच रहे हैं। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक में आंखों से पानी आने, चुभन और पलकों में सूजन जैसी समस्याएं देखने को मिल रही हैं। युवा भी इन परेशानियों से अछूते नहीं हैं।
राजधानी के एम्स, हमीदिया और जेपी अस्पताल में आंखों से जुड़ी समस्याओं के उपचार के लिए मरीज पहुंच रहे हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, धूल और प्रदूषण के महीन कण आंखों में एलर्जी और जलन पैदा कर सकते हैं। वहीं, वायरल और बैक्टीरियल संक्रमण भी कंजेक्टिवाइटिस की वजह बन सकते हैं। ऐसे में आंखों में लालिमा या पानी आने की समस्या को केवल धूल का असर मानकर नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है।
धूल के कण आंखों में पैदा कर रहे परेशानी
बारिश थमने के बाद सड़कों पर जमा मिट्टी सूखकर हवा में उड़ने लगती है। वाहनों की आवाजाही और निर्माण कार्यों के दौरान धूल के महीन कण वातावरण में फैलते हैं। आंखों के सीधे संपर्क में आने पर ये कण जलन, खुजली और एलर्जी की समस्या बढ़ा सकते हैं। दूसरी ओर, तापमान और मौसम में उतार-चढ़ाव के बीच आंखों में संक्रमण की आशंका भी बनी रहती है।
हमीदिया अस्पताल के वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. सूरज कुमार के अनुसार, धूल के सूक्ष्म कण आंखों में एलर्जिक कंजेक्टिवाइटिस का कारण बन सकते हैं। इसके अलावा वायरल और बैक्टीरियल संक्रमण से भी आंखों में लालिमा, सूजन, पानी आने और चुभन जैसी शिकायतें होती हैं। दोनों स्थितियों के लक्षण मिलते-जुलते हो सकते हैं, इसलिए सही कारण का पता लगाने के लिए चिकित्सकीय जांच जरूरी है।
खुजली होने पर आंखें रगड़ना पड़ सकता है भारी
आंखों में जलन या खुजली होने पर लोग बार-बार आंखें रगड़ने लगते हैं। इससे परेशानी बढ़ सकती है। यदि आंखों में संक्रामक कंजेक्टिवाइटिस है, तो संक्रमित स्राव या दूषित हाथों के संपर्क से संक्रमण दूसरे लोगों तक भी पहुंच सकता है। घर में किसी एक सदस्य को संक्रमण होने पर अन्य लोगों को भी सतर्क रहने की जरूरत है।
विशेषज्ञों के अनुसार, आंखों में लालिमा, लगातार पानी आना, पलकों में सूजन और सुबह उठने पर पलकों का चिपकना जैसे लक्षण दिखाई देने पर लापरवाही नहीं करनी चाहिए। आंखों में तेज दर्द, रोशनी से परेशानी या नजर धुंधली होने पर तत्काल नेत्र विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए।
बिना डॉक्टर की सलाह आई ड्रॉप डालना खतरनाक
आंखों की परेशानी होने पर कई लोग मेडिकल स्टोर से खुद ही आई ड्रॉप खरीदकर इस्तेमाल करने लगते हैं। डॉक्टरों ने विशेष रूप से स्टेरॉयड युक्त आई ड्रॉप के अनियंत्रित इस्तेमाल से बचने की सलाह दी है। गलत दवा आंखों की समस्या को गंभीर बना सकती है और कॉर्निया को नुकसान पहुंचा सकती है।
एलर्जी, वायरल संक्रमण और बैक्टीरियल संक्रमण का उपचार अलग-अलग हो सकता है। इसलिए बिना जांच एंटीबायोटिक या स्टेरॉयड युक्त आई ड्रॉप का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। आंखों में लगातार जलन या लालिमा बने रहने पर चिकित्सकीय सलाह लेकर ही दवा का उपयोग करना उचित है।
इन सावधानियों से बच सकती हैं आंखें
– धूल और प्रदूषण वाले इलाकों में बाहर निकलते समय आंखों को ढकने वाला चश्मा पहनें।
– हाथों को साबुन और पानी से बार-बार धोएं तथा गंदे हाथों से आंखों को न छुएं।
– आंखों को रगड़ने से बचें, क्योंकि इससे जलन और सूजन बढ़ सकती है।
– संक्रमित व्यक्ति का तौलिया, रुमाल, तकिया और अन्य निजी सामान साझा न करें।
– डॉक्टर की सलाह से लुब्रिकेटिंग आई ड्रॉप का उपयोग करें।
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