भगवान भरोसे डॉक्टर्स कॉलोनी: जर्जर मकान, टूटी सड़कें और चोरों के साए में जी रहे चिकित्सक
बार-बार शिकायतों के बावजूद प्रबंधन की आंखें बंद

जबलपुर, यशभारत। नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज के दद्दा मैदान के पास स्थित डॉक्टर्स कॉलोनी बदहाली और अव्यवस्थाओं की जीती-जागती तस्वीर बन चुकी है। जिन चिकित्सकों के कंधों पर हजारों मरीजों की जिंदगी बचाने की जिम्मेदारी है, वे खुद जर्जर मकानों, टूटी सड़कों, गंदगी और असुरक्षा के बीच रहने को मजबूर हैं। हालत यह है कि कॉलोनी में मूलभूत सुविधाएं तक नदारद हैं, लेकिन मेडिकल कॉलेज प्रबंधन लगातार शिकायतों के बाद भी हाथ पर हाथ धरे बैठा है।
खंडहर बन चुके क्वार्टर, खतरे के साए में परिवार
कॉलोनी के अधिकांश सरकारी आवास वर्षों से मरम्मत की बाट जोह रहे हैं। दीवारों का प्लास्टर झड़ रहा है, कई भवनों की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी इस ओर ध्यान देने को तैयार नहीं हैं।
सड़कें नहीं, गड्ढों का जाल; जलभराव से नारकीय हालात
कॉलोनी के भीतर की सड़कें पूरी तरह उखड़ चुकी हैं और बड़े-बड़े गड्ढों में तब्दील हो गई हैं। मामूली बारिश या पाइपलाइन लीकेज के बाद पूरे परिसर में जलभराव की स्थिति बन जाती है। कीचड़ और गंदे पानी के बीच से गुजरने को मजबूर डॉक्टरों और उनके परिवारों के लिए यह कॉलोनी किसी सजा से कम नहीं है।
गंदगी का अंबार, बीमारियों का बढ़ता खतरा
सफाई व्यवस्था पूरी तरह चौपट हो चुकी है। जगह-जगह कचरे के ढेर और फैली गंदगी से मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है। डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है, लेकिन जिम्मेदारों की उदासीनता के कारण स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है।
दिनदहाड़े चोरी, असामाजिक तत्वों का अड्डा बनी कॉलोनी
सुरक्षा व्यवस्था की स्थिति और भी चिंताजनक है। कई स्ट्रीट लाइटें बंद पड़ी हैं और खाली पड़े क्वार्टरों पर असामाजिक तत्वों की नजर है। दिनदहाड़े कीमती सामान चोरी होने की घटनाओं से डॉक्टरों और उनके परिवारों में दहशत का माहौल है। रहवासियों का आरोप है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने सुरक्षाकर्मियों की तैनाती तक जरूरी नहीं समझी।
शिकायतों पर भी मौन, जिम्मेदारों की उदासीनता पर सवाल
डॉक्टरों का कहना है कि वर्षों से समस्याओं के निराकरण की मांग की जा रही है, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिला। हालात यह हैं कि प्रदेश के सबसे बड़े मेडिकल संस्थानों में शामिल इस कॉलेज की डॉक्टर्स कॉलोनी खुद बदइंतजामी की शिकार है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब डॉक्टर ही सुरक्षित और सुविधाजनक माहौल से वंचित हैं, तो आखिर जिम्मेदारों की जवाबदेही तय कब होगी?








