डॉक्टरों के लिए ‘डिजिटल प्रचार’ पर ब्रेक, मरीजों के रिव्यू-टेस्टिमोनियल शेयर करने पर लगा बैन
एनएमसी ने जारी की सख्त गाइडलाइंस; फर्जी फॉलोअर्स, 'बेस्ट' या '100% गारंटी' जैसे दावों पर रोक, उल्लंघन पर रजिस्ट्रेशन होगा सस्पेंड

जबलपुर। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने डॉक्टरों और अस्पतालों के लिए नैतिक विज्ञापन एवं सार्वजनिक संचार पर नई गाइडलाइंस जारी की हैं। नए नियमों के तहत अब डॉक्टर या अस्पताल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को अपनी फ्री मार्केटिंग के लिए इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।
नए नियमों के अनुसार, अब मरीज की अनुमति से भी उसके रिव्यू, ‘इलाज से पहले और बाद’ (Before-After) की फोटो/वीडियो शेयर करना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। साथ ही ‘बेस्ट डॉक्टर’, ‘टॉप स्पेशलिस्ट’, ‘100% सफलता’ या ‘गारंटीड इलाज’ जैसे लुभावने व बड़े दावों पर भी रोक लगा दी गई है।
* रिव्यू व टेस्टिमोनियल पर रोक: मरीज की सहमति के बावजूद उनके वीडियो या लिखित रिव्यू का प्रचार के लिए उपयोग नहीं होगा।
* पेड एंगेजमेंट पर बैन: फेक फॉलोअर्स, खरीदे गए लाइक्स, पेड गूगल रिव्यूज या इन्फ्लुएंसर्स को कमीशन देना अब अवैध है।
* AI और ड्रग्स एंडोर्समेंट बंद: एआई से फर्जी मरीज की आवाज/वीडियो बनाना और किसी खास दवा या मेडिकल डिवाइस का प्रचार बैन है।
* सख्त कार्रवाई: नियमों का पहली बार उल्लंघन करने पर चेतावनी व प्रशिक्षण मिलेगा, वहीं दोबारा गलती करने पर डॉक्टर का लाइसेंस 1 से 3 साल के लिए निलंबित हो सकता है।
डॉक्टर केवल अस्पताल की सुविधाएं, अपनी फीस, पता और सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता से जुड़ी जानकारी ही निष्पक्ष रूप से साझा कर सकेंगे।







