12.74 करोड़ का सायबर फ्रॉड, सिर्फ 55.68 लाख की रिकवरी, सालभर ठगों के मकडज़ाल में फंसकर लोगों ने गंवाई गाढ़ी कमाई, 93 अपराध दर्ज

जबलपुर। साइबर ठगी का ग्राफ लगातार बढ़ता जा रहा है। सन् 2025 में भी कोई ऑनलाइन भेजी गई लिंक तो कोई मुनाफे के लालच में अपनी गाढ़ी कमाई गवां बैठा। साइबर ठग पुलिस, क्राइम ब्रांच, सीबीआई समेत अन्य सरकारी एजेंसियों के अफसर बनकर भी डिजिटल अरेस्ट कर डरा धमकाकर करोड़ों की ठगी करते रहे। हर साल की तरह इस वर्ष भी ठगों ने नए-नए पैंतरे आजमाने के साथ फ्रॉड किया। इंटरनेट के जरिए सायबर अपराधी जहां सायबर क्राइम की वारदातों को अंजाम देते रहे तो वहीं पीडि़त थानों के चक्कर काटते रहे। एक जनवरी से लेकर 4 दिसम्बर तक एक दो नहीं, बल्कि 16 जिलों में घटित होने वाले सायबर फ्रॉड का जिम्मा संभालाने वाली राज्य सायबर जबलपुर में दर्ज साइबर क्राइम पर अगर नजर दौड़ाई जाएं तो साइबर ठगी के मकडज़ाल मेंं फंसे लोगों के साथ कुल 12 करोड़ 74 लाख रूपए का साइबर फ्रॉॅड हुआ है। जिसमें से सिर्फ 55 लाख 68 हजार रूपए ही होल्ड कराने के साथ रिकवरी हुए है। राज्य साइबर पुलिस ने करीब 93 अपराध दर्ज किए है जिसमें 40 गिरफ्तारियां हुई है। इसके अलावा कई मामले अब तक लंबित है। अब साल के अंत माह में लंबित मामलों के निपटारे में भी पुलिस जुटी है। इसके साथ ही फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास भी तेज कर दिए गए हैं।
24 घंटे अहम, झांसे में न आने की पुकार अनसुनी
साइबर ठगों द्वारा निकाली गई राशि को वापिस पाने में चौबीस घंटे अहम होते हैं। अगर ठगी के चौबीस घंटे के पहले पीडि़त पुलिस, बैंक से संपर्क कर ले तो खाते से ट्रांसफर हुई रकम को फ्रीज कराया जा सकता है बल्कि उसकी रकम भी कराई जा सकती है। वहीं साइबर ठगी को लेकर सरकार, पुलिस विशेष अभियान चला रही है लोगों को जागरूक करने के लिए समय समय पर एडवाइजरी भी जारी होती है। जिसमें साइबर फ्रॉड से बचने के टिप्स, सावधानियां बरतने, ठगों के झांसे में न आने समेत अन्य जानकारियां होती है लेकिन लोगों में जागरूकता नहीं बढ़ रही है जिसका फायदा ठग उठाते है।
इन पैंतरों के जरिए बढ़े साइबर फ्रॉड
डिजीटल अरेस्ट, लोन एप फ्रॉड, वित्तीय फ्रॉड किए। इस वर्ष साइबर अपराधियों के टारगेट मेें सबसे अधिक वृद्धजन रहे। दस्तावेजों को अपडेट करने, गिफ्ट, लिंक के जरिए भी जालसाजी हुई। ठगों ने गिरफ्तारियों का भय दिखाकर भी खूब लोगों को चपत लगाई। इसके अलावा शेयर मार्केट मेंं मुनाफे का लालच, ऑनलाइन ट्रेडिंग, घर बैठे जॉब, ऑनलाइन पार्सल, मोबाइल हैक करने के साथ भी ठगी की वारदातें की गई। इसके अलावा कुछ तो ऐसे भी मामले सामने आए जिसमें बिना ओटीपी पूछे ही खाते से रकम निकाली गई।
पीडि़त काटते रहे चक्कर, न रकम मिली, न आरोपी
सायबर अपराधों का शिकार हुए पीडि़त पुलिस अधिकारियों के पास पहुंचने के साथ दफ्तरों के चक्कर काटते रहे है। कभी उन्हें लिखित शिकायत लेकर चलता कर दिया गया तो कभी जांच का आश्वासन देकर टरका दिया जाता है अगर कायमी हो भी गई तो अधिकांश मामलों में साइबर ठगों तक पुलिस के हाथ नहीं पहुंच सके हंै। ऐसे में पीडि़त जहां चक्कर काटता रहता है। इक्कादुक्का मामलो को छोडक़र अधिकांश में जिम्मेदार भी हीलाहवाली करते करते है। जिसके चलते न तो आरोपी मिलते है और न ही ठगी की रकम जब्त होती पाती है।
नाक कटी, बचाते में लगे रहे एसपी
साइबर ठगों ने पुलिस की नाक काटी है जिसे बचाने में राज्य साइबर जोन जबलपुर पुलिस अधीक्षक प्रणय नागवंशी जुटे रहे। 2025 मेें दर्ज सायबर अपराधों, रिकवरी संबंधित जानकारी लेने के लिए उनसे रविवार को दोपहर 1.41 बजे उनके मोबाइल नंबर पर कॉल कर संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि आज रविवार है सोमवार को साइबर पोर्टल में देखकर जानकारी देंगे। जब सोमवार, मंगलवार, बुधवार को संपर्क करने का प्रयास किया गया तो उन्होंने बीते तीन दिनों से लगातार कॉल रिसीव करना जरूरी नहीं समझा। गुरूवार को नवभारत ने पड़ताल शुरू की। सूत्रों से जानकारी जुटाई तो समझ आया कि साहब पुलिस की कटी नाक बचाने में लगे थे। रिकवरी का आंकड़ा बेहद चौंकाने वाला था।







