भोपाल के इकबाल मैदान के नाम पर छिड़ा विवाद, NHRC सदस्य बोले- यह हमारे माथे पर कलंक

भोपाल के इकबाल मैदान के नाम पर छिड़ा विवाद, NHRC सदस्य बोले- यह हमारे माथे पर कलंक
भोपाल, यश भारत। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल का ऐतिहासिक इकबाल मैदान एक बार फिर चर्चाओं और विवादों के केंद्र में है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने इस मैदान के नाम पर कड़ा ऐतराज जताते हुए इसे बदलने की मांग की है। कानूनगो ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा कर अल्लामा इकबाल को पाकिस्तान की अवधारणा का जनक बताते हुए कहा कि उनके नाम पर राजधानी में कोई स्थल होना हमारे माथे पर कलंक है।
पूर्वजों का खून चूसकर दिया जाता था वजीफा
प्रियंक कानूनगो ने अपने ट्वीट (X) में भोपाल के नवाबों पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने लिखा, पाकिस्तान बनाए जाने का प्रस्ताव लिखने वाले इकबाल के नाम पर भोपाल में मैदान होना कलंक है। भोपाल का नवाब, गरीब जनता और हमारे पूर्वजों का खून चूसकर इस इकबाल को ऐशो-आराम के लिए हजारों रुपए वजीफे में देता था। हम इस कलंक को मिटाकर अपने पूर्वजों को श्रद्धांजलि देंगे।
इतिहास के पन्नों में इकबाल और पाकिस्तान का विचार
विवाद की जड़ अल्लामा मोहम्मद इकबाल द्वारा 1930 के मुस्लिम लीग के इलाहाबाद अधिवेशन में दिया गया अध्यक्षीय भाषण है।
इसी भाषण में इकबाल ने पहली बार भारत के उत्तर-पश्चिम में मुस्लिम बहुल क्षेत्रों (पंजाब, सिंध, बलूचिस्तान आदि) को मिलाकर एक अलग मुस्लिम राज्य का विचार रखा था।
हालांकि ‘पाकिस्तान’ शब्द का प्रयोग बाद में 1933 में चौधरी रहमत अली ने किया, लेकिन वैचारिक आधार इकबाल के भाषण को ही माना जाता है।
भोपाल से रहा है गहरा नाता
ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुसार, शायर इकबाल चार बार भोपाल आए थे और यहाँ लगभग छह महीने का समय बिताया था। इसी दौरान उन्होंने अपनी कई प्रसिद्ध रचनाएँ लिखी थीं। उनकी याद में ही भोपाल के पुराने शहर में इस मैदान का नामकरण किया गया था, जिसकी दीवारों पर आज भी उनकी शायरी अंकित है। यह स्थान दशकों से भोपाल की सांस्कृतिक और साहित्यिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा है।
नाम बदलने की मांग ने पकड़ी रफ्तार
कानूनगो के इस बयान के बाद भोपाल में नाम बदलने की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। इससे पहले भी शहर के कई ऐतिहासिक स्थलों के नाम बदलने की मांग उठती रही है। अब देखना यह होगा कि राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन इस संवेदनशील और ऐतिहासिक मुद्दे पर क्या रुख अपनाता है।







