मध्य प्रदेशराज्य

CM Helpline: आस, विश्वास या फिर गले की फांस..?

यश भारत, शहडोल। मध्यप्रदेश की सरकार ने प्रदेश वासियों की शिकायत और समस्या के त्वरित निदान किए जाने की मंशा से सीएम हेल्पलाइन यानि कि, डाॅयल 181 की शुरुआत की थी। वर्तमान परिदृश्य की बात करें तो, सीएम हेल्पलाइन मानो इन दिनों किसी मदारी के डमरू की भांति ही प्रदर्शित है। सरकार की मंशा को फलीभूत करने भले ही संभाग और जिला मुखिया इसकी समीक्षा करते हों, विभागीय अधिकारियों को निर्देश भी देते हों! लेकिन, जन समस्या व शिकायत का निदान, संबंधित विभाग अधिकारियों की कार्यशक्ति और इच्छा पर आ कर अटक जाती है। परिणाम स्वरूप, न केवल शहडोल अपितु संभाग के उमरिया और अनूपपुर जिले में भी हजारों की तादात में सीएम हेल्पलाइन में की गई शिकायतें एक लंबे समय से दर्ज और लंबित हैं।

जिनका समाधान चुटकी में, वह भी हैं अटकी में

विचारणीय है कि, कई ऐसी शिकायतें भी सीएम हेल्पलाइन में दर्ज हैं, जिनका तत्काल समाधान या निदान किया जा सकता है। परंतु संबंधित विभाग के अफसरों की इस ओर अनदेखी और लापरवाही की वजह से यह शिकायतें छः-छ: माह से लंबित हैं। इतना ही नहीं, कई शिकायतें तो लगभग साल भर या उससे अधिक समय से भी लंबित हैं। वजह साफ है… आधिकारिक तौर पर मनमानी, तानाशाही, लापरवाही, अनदेखी और कर्तव्यनिष्ठा से गुरेज? वहीं दूसरी ओर, शिकायतकर्ता या पीड़ित इस आस में निगाहें टिकाये बैठा रहता है कि, उसे देर सी सही लेकिन, न्याय मिलकर रहेगा।

सरकार की मंशानुरूप परिलक्षित नहीं

लोगों का कहना है, जब सीएम हेल्पलाइन की शुरुआत की गई थी, तो उस समय यह महसूस हुआ कि, सरकार पारदर्शिता के साथ जनता के साथ खड़ी है और जन समस्या के निराकरण को लेकर उसकी दूरदर्शी सोच के, दूरगामी परिणाम दिखलाई देंगे। अब हालात यह है कि, सीएम हेल्पलाइन नंबर पर शिकायत करना, मानो बेईमानी और एक लंबे समय का इंतजार..! जबाब खोजना होगा कि, प्रदेश की जनता की एक शिकायत पर जल्द निराकरण, समाधान और राहत का यह हेल्पलाइन नंबर आखिर क्यों,, अपने मंशानुरूप परिलक्षित नहीं?

कई ऐसे मामले भी आए दिन देखने मिलते हैं, जहां पीड़ित व्यक्ति के शिकायत बाद उसके निराकरण और पीड़ित को राहत दिलाने की जगह संबंधित विभाग के आला अधिकारी पीड़ित पर शिकायत बंद करवाने का दबाव बनाने हैं या जबरन शिकायत को बंद कर देते हैं। या फिर, झूठे मामले में फंसने या विभागीय तौर उसे आघात पहुंचाने तक की बात कर बैठते हैं। सवाल यह उठता है कि, सीएम हेल्पलाइन पर किए गए शिकायतों के निराकरण को लेकर बीते कुछ दिनों से अधिकारी, लापरवाही क्यों बरत रहे हैं? मुख्यमंत्री को चाहिए कि, इस पर गंभीरता से विचार करें और सुधार करें। ताकि, प्रदेश की जनता को उनके हेल्प से लाईन मिल सके।

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