जबलपुरमध्य प्रदेश

मेडिकल कॉलेज की कैश शाखा में 66 लाख गबन का मामला, पांच पर FIR; तीन हिरासत में

कैश बुक और बैंक रिकॉर्ड का होगा मिलान

जबलपुर,यशभारत। नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल की कैश शाखा में सामने आई कथित वित्तीय अनियमितता का मामला अब पुलिस जांच के दायरे में है। मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. नवनीत सक्सेना की शिकायत पर गढ़ा थाना पुलिस ने पांच लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। इनमें से तीन आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस कैश शाखा में हुए लेन-देन, रिकॉर्ड और बैंक में जमा राशि से संबंधित दस्तावेजों की बारीकी से जांच कर रही है।

1.63 करोड़ की राशि का रिकॉर्ड, 66 लाख से अधिक के अंतर की जांच

मामले से जुड़े दस्तावेजों में 1 करोड़ 63 लाख 78 हजार 456 रुपए की राशि का उल्लेख किया गया है। वहीं, जांच में 66 लाख 35 हजार 611 रुपए के कथित वित्तीय अंतर की बात सामने आई है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि रिकॉर्ड में दर्ज राशि और बैंक खातों में जमा रकम के बीच अंतर कैसे पैदा हुआ।

पांच लोगों के खिलाफ मामला, तीन हिरासत में

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पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार मनोहर केवट, साधना चंदौल, भानु सिंह शाक्यवार, अरविन्द धुर्वे और विशाल सराठे के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया है। इनमें भानु सिंह शाक्यवार, अरविन्द धुर्वे और विशाल सराठे को हिरासत में लिया गया है। तीनों से कैश शाखा में उनके कार्यकाल, जिम्मेदारियों और संबंधित वित्तीय लेन-देन को लेकर पूछताछ की जा रही है।

कैश बुक और बैंक रिकॉर्ड का होगा मिलान

मेडिकल कॉलेज की कैश शाखा में छात्र फीस, ओपीडी, आईपीडी सहित विभिन्न मदों से राशि प्राप्त होती है। पुलिस इन सभी लेन-देन का रिकॉर्ड खंगाल रही है। पुराने कैश बुक, रसीद बुक, बैंक स्टेटमेंट, जमा पर्चियों और अन्य वित्तीय दस्तावेजों का मिलान जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि राशि प्राप्त होने से लेकर बैंक में जमा होने तक की प्रक्रिया में कहीं कोई अनियमितता तो नहीं हुई।

पूछताछ में सामने आएगी भूमिका

गढ़ा थाना प्रभारी प्रसन्न शर्मा ने बताया कि डीन की शिकायत पर पांच लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। तीन लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि कथित वित्तीय अंतर किस अवधि में हुआ और उसमें संबंधित कर्मचारियों की क्या भूमिका रही। फिलहाल पुलिस की जांच और पूछताछ जारी है। कैश शाखा के वित्तीय रिकॉर्ड की जांच पूरी होने के बाद ही कथित अनियमितता की वास्तविक स्थिति और जिम्मेदार लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।

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