भोपालमध्य प्रदेश

सांपों से डर ही नहीं, पर्यावरण के लिए भी जरूरी हैं ये जीव शहर के विस्तार के साथ बढ़ रही वन्यजीवों से मुठभेड़, देखें वीडियो

सांपों से डर ही नहीं, पर्यावरण के लिए भी जरूरी हैं ये जीव

शहर के विस्तार के साथ बढ़ रही वन्यजीवों से मुठभेड़, भोपाल में सर्पदंश रोकने के लिए जागरूकता जरूरी

भोपाल यश भारत । सांप का नाम सुनते ही आमतौर पर लोगों के मन में डर पैदा हो जाता है, लेकिन प्रकृति और पर्यावरण के संतुलन में सांपों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। ये पारिस्थितिकी तंत्र में खाद्य शृंखला का अहम हिस्सा हैं और चूहों जैसे जीवों की संख्या नियंत्रित करने में मदद करते हैं। दूसरी ओर तेजी से बढ़ते शहरीकरण और प्राकृतिक आवासों में हो रहे बदलाव के कारण इंसानों और वन्यजीवों के बीच संपर्क बढ़ रहा है। भोपाल जैसे हरियाली से घिरे शहर में यह स्थिति विशेष रूप से दिखाई देती है।

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सांपों की पर्यावरण में क्या उपयोगिता है?

सांप प्रकृति के संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कई प्रजातियां चूहों और अन्य छोटे जीवों का शिकार करती हैं। इससे कृषि क्षेत्रों गोदामों और मानव बस्तियों में कृंतकों की संख्या नियंत्रित रखने में मदद मिलती है। इसलिए सांपों को केवल जहरीले जीव या खतरे के रूप में देखना सही नहीं है। हर सांप जहरीला नहीं होता और अधिकांश सांप इंसानों से दूरी बनाए रखना पसंद करते हैं।

 

क्या शहर के फैलाव के साथ वन्यजीवों से मुठभेड़ बढ़ रही है?

शहरी विस्तार के साथ जंगल झाड़ियां खेत और प्राकृतिक जलस्रोत प्रभावित होते हैं। ऐसे क्षेत्रों में रहने वाले वन्यजीवों का आवास सिकुड़ने पर उनका मानव बस्तियों के नजदीक आना स्वाभाविक है। निर्माण कार्य पेड़ों की कटाई कचरा भोजन की उपलब्धता और बारिश के दौरान बिलों में पानी भरना भी वन्यजीवों की गतिविधियों को प्रभावित कर सकता है। भोपाल में इंसानों और सांपों के बीच बढ़ता संपर्क इसी व्यापक बदलाव के संदर्भ में देखा जा सकता है।

क्या सांपों से संबंधित कोई कानून भी है?

भारत में सांपों की कई प्रजातियां वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत संरक्षित हैं। इसलिए सांपों को पकड़ना मारना रखना या उनका व्यापार करना परिस्थितियों और संबंधित प्रजाति के आधार पर कानूनी प्रावधानों के दायरे में आ सकता है। किसी सांप के मिलने पर उसे खुद पकड़ने या मारने के बजाय प्रशिक्षित रेस्क्यूअर अथवा संबंधित वन विभाग से संपर्क करना अधिक सुरक्षित और उचित है।

भोपाल में इतने सांप निकलने के क्या कारण हैं?

भोपाल की भौगोलिक स्थिति आसपास के वन क्षेत्र, बड़ी संख्या में हरित क्षेत्र तालाब और प्राकृतिक आवास इसे वन्यजीवों के लिए अनुकूल बनाते हैं। मानसून के दौरान सांपों के बिलों में पानी भरने से वे सुरक्षित और सूखी जगह की तलाश में निकल सकते हैं। इसके अलावा जहां चूहे और मेंढक जैसे शिकार पर्याप्त मात्रा में होते हैं, वहां सांपों के मिलने की संभावना भी रहती है। शहर का लगातार विस्तार भी इंसान और वन्यजीव के संपर्क को बढ़ाने वाला एक कारण हो सकता है।

सर्पदंश की घटनाएं रोकने के क्या उपाय हैं?

सर्पदंश से बचाव के लिए जागरूकता सबसे महत्वपूर्ण उपायों में से एक है। रात में खुले पैर चलने से बचना खेत या झाड़ियों में जाते समय जूते पहनना घर के आसपास कचरा और अनावश्यक झाड़ियां न जमा होने देना तथा सांप दिखाई देने पर उससे दूरी बनाए रखना जरूरी है।सर्पदंश होने पर झाड़ फूंक या घरेलू उपचार के बजाय व्यक्ति को जितनी जल्दी संभव हो स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल पहुंचाना चाहिए। सांप को पकड़ने या मारने की कोशिश में समय गंवाना भी खतरनाक हो सकता है।

स्नेक रेस्क्यूअर को सरकारी मदद मिलती है या नहीं?

स्नेक रेस्क्यूअर अक्सर लोगों की सूचना पर अपनी सुरक्षा का जोखिम लेकर सांपों को पकड़कर सुरक्षित स्थान पर छोड़ने में मदद करते हैं। हालांकि उनकी भूमिका प्रशिक्षण सुरक्षा उपकरण बीमा और सरकारी सहायता की व्यवस्था स्थानीय स्तर पर अलग अलग हो सकती है। जरूरत इस बात की है कि रेस्क्यू कार्य को अधिक व्यवस्थित बनाया जाए और प्रशिक्षित रेस्क्यूअर के लिए प्रशिक्षण सुरक्षा उपकरण हेल्पलाइन तथा आपातकालीन सहायता जैसी सुविधाओं पर संस्थागत व्यवस्था विकसित की जाए।

सांपों पर लिखी किताब के बारे में बताइए

सांपों पर लिखी किताब का उद्देश्य केवल सांपों की प्रजातियों की जानकारी देना नहीं बल्कि लोगों में इनके प्रति वैज्ञानिक समझ और जागरूकता पैदा करना भी हो सकता है। ऐसी पुस्तकों के माध्यम से पाठकों को सांपों की पहचान उनके व्यवहार पर्यावरण में उनकी भूमिका विषैले और गैर विषैले सांपों के अंतर तथा सर्पदंश की स्थिति में अपनाई जाने वाली सावधानियों की जानकारी मिलती है। इससे डर और गलत धारणाओं को कम करने में मदद मिल सकती है।

भविष्य का भोपाल इंसान और वन्यजीवों के लिए साझा स्थान कैसे बन सकता है?

भविष्य के भोपाल में विकास और वन्यजीव संरक्षण के बीच संतुलन जरूरी होगा। प्राकृतिक क्षेत्रों जलस्रोतों और हरित गलियारों को सुरक्षित रखना निर्माण की बेहतर योजना बनाना लोगों को वन्यजीवों के व्यवहार के बारे में जागरूक करना और रेस्क्यू व्यवस्था को मजबूत करना इसके महत्वपूर्ण हिस्से हो सकते हैं। सांपों को देखते ही मारने की बजाय सुरक्षित दूरी बनाकर प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम को सूचना देना चाहिए। दूसरी ओर वन्यजीव संरक्षण के साथ साथ मानव सुरक्षा को भी प्राथमिकता देनी होगी। सही जानकारी वैज्ञानिक सोच और बेहतर शहरी नियोजन के जरिए भोपाल इंसानों और वन्यजीवों के बीच सुरक्षित सह अस्तित्व की दिशा में आगे बढ़ सकता है।

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