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ओएफके के समीप परियट पर स्टाप डेम बने तो हो सकता है बेहतर जल प्रबंधन 

गर्मी के दिनों में शहर के पूर्वी हिस्से के साथ आयुध संस्थानों का दूर हो सकता है जल संकट

जबलपुर यश भारत। आयुध निर्माणी खमरिया क्षेत्र से होकर बहने वाली  नदी, जो घाना चकरघटा, लाल पुल से होते हुए वर्धा घाट तथा आगे परशुराम कुंड की ओर जाती है और आगे जाकर हिरण नदी में मिल जाती है। वर्षा ऋतु के दौरान आस पास के जंगली क्षेत्र से आकर पर्याप्त मात्रा में परियट नदी में जल प्रवाहित होता है। किंतु  इस जल का अधिकांश भाग बिना समुचित उपयोग के आगे बह जाता है। वर्तमान में आवश्यकताओं को देखते हुए यदि समुचित समन्वय से जल प्रबंधन पर विचार कर खमरिया के आसपास उक्त नदी पर स्टाॅप डेम या चेक डैम बन कर तैयार हो जाता है तो वर्षा ऋतु में बेकार बह जाने वाले जल को रोक कर न केवल शहर के बड़े हिस्से की प्यास बुझेगी अपितु सेना के लिए सामान बनाने वाले सुरक्षा संस्थानों में पानी की कमी से उत्पादन संकट नहीं होकर निर्वाध उत्पादन होगा।
उल्लेखनीय है कि द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान खमरिया फैक्ट्री की स्थापना 85 वर्ष पूर्व 1942 में हुई थी।उस समय से निर्माणी में उत्पादन के लिए पानी का उपयोग समीप से बहती परियट नदी से होता आ रहा है। चूंकि उस समय घमापुर से लेकर रांझी तक कोई बसाहट नहीं थी। इसलिए जल संकट जैसी कोई बात नहीं थी।बाद में 1969 में व्हीएफजे और जीआईएफ बनने के बाद पानी की आपूर्ति रांझी जल शोधन संयंत्र से होने लगी तब भी आबादी कम होने से कोई समस्या नहीं रही। बाद में बड़ी तेजी से आसपास बस्तियां बसने और जनसंख्या वृद्धि से परियट नदी से आपूर्ति होने वाले पानी की किल्लत बढ़ती चली गई और अब हर साल गर्मियों में एक स्थाई समस्या बन गई।
इस संबंध में अराजपत्रित अधिकारी संघ खमरिया ब्रांच के अध्यक्ष एवं जेसीएम तृतीय सदस्य अजय यादव ने निर्माणी की जल समस्या को लेकर एम आई एल के सीएमडी को पत्र लिखकर निर्माणी के पास परियट पर स्टाप डेम बनाने के लिए सुझाव दिया है। उल्लेखनीय है कि ओएफके प्रति वर्ष करोड़ों रुपए नगर निगम को जल कर के रूप में देती है। इसके बाद भी जल संकट बना रहता है। उन्होंने कहा है कि एम आई एल स्थानीय निकाय के साथ जिला प्रशासन,क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों से समन्वय स्थापित कर स्टाॅप डेम बनाने की मांग की है।

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यदि जनहित एवं क्षेत्र के समग्र विकास को ध्यान में रखते हुए उक्त नदी पर उपयुक्त स्थान का तकनीकी सर्वेक्षण कर स्टॉप डैम/चेक डैम का निर्माण कराया जाता है तो  इससे वर्षा जल का संरक्षण किया जा सकेगा तथा आसपास के क्षेत्र में जलस्तर बढ़ाने, भूजल पुनर्भरण, सिंचाई एवं अन्य आवश्यक कार्यों में इस जल का सदुपयोग किया जा सकेगा। इसके अतिरिक्त, जल संरक्षण से खमरिया एवं आसपास के क्षेत्रों के पर्यावरण, कृषि तथा आम नागरिकों को भी दीर्घकालीन लाभ प्राप्त हो सकता है। यह कार्य जल संरक्षण एवं क्षेत्र के विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण साबित होगा।
*इनका कहना है*
जल संरक्षण के उद्देश्य से पहले ही परियट पर स्टाप डेम बनाने के लिए सुझाव भेजा गया था। लेकिन नगर निगम की ओर से उस पर कोई रुचि नहीं दिखाई गई। परिणाम स्वरूप उस पर आगे कोई बात नहीं बड़ी। ओएफके प्रशासन का कहना है कि भारत सरकार भी जल संरक्षण के प्रति गंभीर है। यदि ऐसा होता है तो यह निर्माणी और शहर के हित में अच्छा होगा।
अविनाश शंकर
पीआरओ ओएफके
जबलपुर

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