जहरीली शराब कांड : मुख्य आरोपी वेंटिलेटर पर: जुझार सिंह की तबीयत बिगड़ी, डॉक्टरों को मारपीट का शक, परिजनों का आरोप– जेल प्रशासन ने छिपाई बात

सागर, यशभारत l सागर के बहुचर्चित जहरीली शराब त्रासदी, जिसमें 40 लोगों की जान चली गई थी, के मुख्य आरोपी जुझार सिंह लोधी की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है। बंडा उप जेल में बंद आरोपी को गंभीर हालत में भोपाल के हमीदिया अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहाँ वह वेंटिलेटर पर जिंदगी और मौत से जूझ रहा है। जेल के भीतर आरोपी की तबीयत बिगड़ने का यह मामला गहराता जा रहा है, क्योंकि एक तरफ डॉक्टरों ने प्राथमिक जांच के आधार पर मारपीट की आशंका जताई है, वहीं दूसरी तरफ जेल प्रबंधन इसे पुरानी बीमारी का असर बताकर पल्ला झाड़ रहा है।
हमीदिया के डॉक्टरों को मारपीट का संदेह
भोपाल के हमीदिया अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, प्रारंभिक परीक्षणों और शारीरिक लक्षणों के आधार पर जुझार सिंह के साथ मारपीट होने की प्रबल संभावना प्रतीत होती है। डॉक्टरों का अनुमान है कि मारपीट की वजह से अंदरूनी चोटें आई हैं, जिससे उसकी स्थिति इतनी तेजी से बिगड़ी और उसे वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखना पड़ा।
जेल प्रबंधन की सफाई: ‘पहले से बीमार था आरोपी’
दूसरी ओर, बंडा उप जेल प्रबंधन और जेल अधीक्षक अनुभा चौधरी ने मारपीट के आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। जेल प्रशासन का दावा है कि आरोपी की पहले बायपास सर्जरी हो चुकी थी और उसके सिर में पहले से ही ब्लड क्लॉटिंग (खून का थक्का) की समस्या थी। बीमारी के कारण ही अचानक उसकी हालत बिगड़ी, जिसे तत्काल इलाज के लिए भेजा गया।
आरोप: 10 घंटे देरी से मिली सूचना
आरोपी के भाई बहादुर सिंह लोधी (निवासी नौराज) ने जेल प्रशासन और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। परिजनों के अनुसार
सूचना में देरी: रविवार को तबीयत बिगड़ने पर जुझार सिंह को पहले बंडा जेल से सागर स्थित बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज (बीएमसी) ले जाया गया। परिजनों को इसकी जानकारी अस्पताल पहुँच ने के लगभग 10 घंटे बाद दी गई।
रेफर में लापरवाही: सोमवार को बीएमसी से भोपाल रेफर करने के बाद एम्बुलेंस और कागजी कार्रवाई के नाम पर 10 घंटे का इंतजार कराया गया, जिससे इलाज में देरी हुई। मंगलवार सुबह उसे भोपाल लाया जा सका।
मिलने पर पाबंदी: परिजनों को मरीज से मिलने नहीं दिया जा रहा है और वे केवल दूर से ही उसे देख पा रहे हैं।
बेहतर इलाज से इनकार: परिजनों ने जुझार सिंह को बेहतर इलाज के लिए भोपाल एम्स (AIIMS) स्थानांतरित करने की मांग की थी, लेकिन प्रशासन ने इसे अनसुना कर दिया।
वर्तमान में मामले को लेकर प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा हुआ है और घटना की निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है।







