8 महीने आतंकियों की कैद में रहे मजदूर, सोशल वर्कर आबिद हुसैन और दूतावास की कोशिशों से मिली नई जिंदगी

8 महीने आतंकियों की कैद में रहे मजदूर, सोशल वर्कर आबिद हुसैन और दूतावास की कोशिशों से मिली नई जिंदगी
भोपाल,यशभारत। सात समंदर पार अफ्रीकी देश नाइजर में मौत को करीब से देखकर बगोदर के पांच मजदूर सुरक्षित अपने गांव लौट आए हैं। यह कोई फिल्मी कहानी नहीं, बल्कि हकीकत है। आतंकियों द्वारा आठ महीने पहले अगवा किए गए इन मजदूरों की घर वापसी ने पूरे गिरिडीह जिले को भावुक कर दिया है। सोमवार की शाम जब राजू, फलजीत और चंद्रिका ने अपने गांव डोंडलो की दहलीज पर कदम रखा, तो मानों पूरे इलाके में दिवाली फिर से लौट आई।
फरिश्ता बनकर उभरे आबिद, सरकार ने भी दिखाई तत्परता
इस पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन के पीछे गिरिडीह के चर्चित समाजवेत्ता सैयद आबिद हुसैन की जिद और लगन रही। ‘रियल लाइफ बजरंगी भाईजान’ के रूप में पहचान बना चुके आबिद को अप्रैल 2025 में मोहम्मद सरताज आलम के जरिए इस अपहरण की सूचना मिली थी।
आबिद ने बिना वक्त गंवाए विदेश मंत्रालय (MEA) और नाइजर स्थित भारतीय दूतावास से संपर्क साधा। प्रवासी भारतीय सहायता केंद्र (PBSK) के माध्यम से लगातार फॉलोअप लिया। जिसके बाद दूतावास के सेकंड सेक्रेटरी सत्यवीर सिंह ने खुद ईमेल कर आबिद को मजदूरों की रिहाई की सुखद सूचना दी।
गांव में जश्न, आँखों में आँसू
जैसे ही मजदूरों ने अपनी माटी को छुआ, परिजनों के सब्र का बांध टूट गया। पिता को गले लगाकर बच्चे बिलख पड़े, तो बुजुर्ग माताओं ने अपने लाल की आरती उतारी। आबिद हुसैन ने कहा- “यह जीत टीम वर्क की है। भारत सरकार, विदेश मंत्रालय और दूतावास के अधिकारियों ने जिस तरह रिस्पांस दिया, उसी का नतीजा है कि आज पांचों मजदूर अपने बच्चों के बीच हैं।”







