
जबलपुर, यश भारत। आधार कार्ड महज एक पहचान पत्र नहीं, बल्कि आज बच्चों की पढ़ाई और भविष्य से जुड़ी जरूरी दस्तावेज बन चुका है। इसका सबसे मार्मिक उदाहरण जबलपुर में सामने आया, जहां आधार के अभाव में पढ़ाई छोड़ चुके तीन बच्चों को लंबे इंतजार के बाद उनकी पहचान मिल सकी। 16 वर्षीय कुलदीप गोंड और अभिषेक ठाकुर की पढ़ाई आठवीं के बाद रुक गई थी, जबकि 18 वर्षीय सरिता 11वीं के बाद पढ़ाई जारी नहीं रख सकी। तकनीकी अड़चनों के चलते कुलदीप और अभिषेक करीब दो साल तथा सरिता तीन साल तक आधार बनने का इंतजार करती रही।
कैमरे के सामने छलके सरिता के शब्द
आधार बनने के बाद 18 वर्षीय सरिता ने मीडिया कैमरे के सामने कहा कि उसे अपनी खोई हुई पहचान वापस मिल गई है। उसके लिए आधार कार्ड मिलना सिर्फ एक दस्तावेज हासिल करना नहीं, बल्कि आगे बढ़ने की उम्मीद लौटने जैसा था। गरहा पारा निवासी कुलदीप गोंड और सिविल लाइन, पाटन निवासी अभिषेक ठाकुर की पढ़ाई आधार के अभाव में आठवीं के बाद रुक गई थी। वहीं पाटन के हीरापुर निवासी सरिता 11वीं के बाद पढ़ाई जारी नहीं रख सकी। स्कूल में प्रवेश से लेकर कई सरकारी योजनाओं का लाभ लेने तक आधार जरूरी होने के कारण तकनीकी समस्या ने इन बच्चों के सामने पढ़ाई का रास्ता भी रोक दिया था।
जबलपुर आधार केंद्र की टीम ने सुलझाई अड़चन
जबलपुर आधार केंद्र में DEGM चित्रांशु त्रिपाठी और उनकी टीम ऐसे मामलों में लगातार लोगों की मदद कर रही है। इसी प्रयास के तहत तीनों बच्चों की आधार संबंधी समस्या का समाधान कर उन्हें आधार उपलब्ध कराया गया। इस कार्य में UIDAI के Deputy Director सुमित मिश्रा और भोपाल की टीम का भी विशेष सहयोग रहा।
चित्रांशु त्रिपाठी इससे पहले भी आधार ऑपरेटरों से लोगों की समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर हल करने का आग्रह कर चुके हैं। तीनों बच्चों के आधार बनने की यह कहानी बताती है कि किसी सरकारी दस्तावेज की अड़चन सिर्फ कागज तक सीमित नहीं रहती, बल्कि उसका असर सीधे किसी बच्चे की पढ़ाई और भविष्य पर पड़ सकता है।







