एमयू के छात्र आदिवासियों की बीमारियों पर करेंगे शोध
डॉ. बाबा साहेब अंबेडकर वैद्यकीय प्रतिष्ठान और मेडिकल यूनिवर्सिटी के बीच होगा एमओयू


जबलपुर यशभारत। मेडिकल यूनिवर्सिटी आदिवासी और जनजातीय समुदाय के स्वास्थ्य को लेकर काम करेगी। डॉ. बाबा साहेब अंबेडकर वैद्यकीय प्रतिष्ठान महाराष्ट्र और मेडिकल यूनिवर्सिटी के बीच एमओयू होगा। प्रदेश में 22 आदिवासी बाहुल्य जिले हैं। छात्र आदिवासियों को होने वाली आनुवांशिक बीमारियों जैसे सिकलसेल समेत मौसमी बीमारियों के बारे में जानेंगे। एमओयू के बाद महाराष्ट्र से छात्र यहां आकर शोध कर सकेंगे।
आदिवासियों को मिलेगा लाभ
विशेषज्ञों के अनुसार जनजातीय बाहुल्य क्षेत्र मंडला, डिंडोरी, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर समेत अन्य इलाकों में एमयू व डॉ. बाबा साहेब आम्बेडकर वैद्यकीय प्रतिष्ठान महाराष्ट्र के छात्रों के शोध से आदिवासियों की बीमारियों के सम्बंध में ज्यादा जानकारी सामने आएगी। इससे उनके इलाज में मदद मिलेगी। इसके साथ ही कई बीमारियों के इलाज को लेकर उनकी भ्रांतियां दूर की जाएंगी। अभी कुछ रोगों के इलाज को लेकर कई प्रकार की भ्रांतियां होने के कारण आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र के रहवासी इलाज के लिए समय पर अस्पताल नहीं पहुंचते। वे इलाज के लिए महत्वपूर्ण समय झाड़-फूंक में लगा देते हैं। इससे कई बार मरीज की बीमारी बढ़ जाती है। डॉ. बाबा साहेब अंबेडकर वैद्यकीय प्रतिष्ठान महाराष्ट्र और एमयू के बीच लंबे समय से एमयूओयू के लिए बातचीत का दौर चल रहा था। इसे मेडिकल यूनिवर्सिटी की कार्य परिषद की स्वीकृति मिल चुकी है।
वर्जन
आदिवासियों की सामान्य बीमारियों से लेकर आनुवांशिक बीमारियों व उनके जीवन स्तर को बेहतर बनाने शोध किया जाएगा। इसे लेकर मेडिकल यूनिवर्सिटी और वैधकीय प्रतिष्ठान के छात्र मिलकर काम करेंगे।
डॉ. पुष्पराज बघेल, रजिस्ट्रार, मेडिकल यूनिवर्सिटी







