एफआईआर होगी निरस्त या मिलेगी जमानत, सीएसपी नेहा पच्चीसिया की याचिका पर हाईकोर्ट में फैसला सुरक्षित

कटनी, यशभारत। जमीन सौदबाजी मामले में फरार चल रही पूर्व सीएसपी नेहा पच्चीसिया की याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई पूरी हो चुकी है। जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस राजकुमार चौबे की युगलपीठ ने एफआईआर निरस्त करने और अग्रिम जमानत देने की याचिका पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब अदालत के अंतिम निर्णय का इंतजार किया जा रहा है। सुनवाई के दौरान पूर्व सीएसपी नेहा पच्चीसिया की ओर से पैरवी करते हुए पक्ष रखा गया कि विवादित जमीन की खरीद-फरोख्त में उनकी कोई भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष भूमिका नहीं थी। यह जमीन मारूफ अहमद हनफी के नाम पर खरीदी गई थी और इस सौदे के तहत क्षितिज राज पात्रे ने उनके बैंक खाते में राशि ट्रांसफर की थी। नेहा पच्चीसिया के बैंक खाते से इस लेनदेन में किसी भी प्रकार का भुगतान नहीं किया गया है। उनके अधिवक्ताओं का कहना है कि जमीन के इस सौदे में उनकी संलिप्तता को साबित करने वाला कोई भी ठोस साक्ष्य या सबूत मौजूद नहीं है। इसी आधार पर हाईकोर्ट में एफआईआर को रद्द करने और अग्रिम जमानत का लाभ दिए जाने का अनुरोध किया गया है। विदित हो कि यह पूरा मामला कुठला थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम कन्हवारा में दर्ज हत्या के एक प्रकरण से जुड़ा हुआ है। आरोपों के मुताबिक समय सीमा के भीतर पुलिस द्वारा चालान पेश न किए जाने के कारण हत्या के आरोपी को डिफॉल्ट जमानत का कानूनी लाभ मिल गया था। आरोप है कि इस कथित लापरवाही या सांठगांठ के एवज में संबंधित आरोपियों की जमीन एक बेहद कम कीमत पर खरीदी गई थी। हालांकि सीएसपी नेहा पच्चीसिया शुरू से ही इस जमीन के सौदे और पूरे घटनाक्रम में अपनी किसी भी भूमिका से इंकार करती आ रही हैं। कुठला थाना क्षेत्र में धोखाधड़ी और अन्य गंभीर धाराओं के तहत सीएसपी नेहा पच्चीसिया समेत तीन आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था, जिसके बाद पुलिस ने तीनों की गिरफ्तारी पर 10-10 हजार रुपए का इनाम भी घोषित किया था। अब सबकी निगाहें हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट होगा कि सीएसपी नेहा पच्चीसिया को एफआईआर निरस्त कराने और अग्रिम जमानत के मामले में राहत मिलती है या कानूनी शिकंजा और कसता है।






