दो सोनोग्राफी सेंटरों के मामले में हाईकोर्ट का अहम आदेश,
पीसीपीएनडीटी एक्ट में पुलिस जांच पर रोक

जबलपुर, यश भारत। प्रसव पूर्व लिंग परीक्षण के कथित मामले में जबलपुर के दो सोनोग्राफी सेंटरों से जुड़े प्रकरण में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। न्यायमूर्ति हिमांशु जोशी ने डॉ. राजेंद्र कुमार अग्रवाल और डॉ. सतीश अग्रवाल की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए पीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत पुलिस द्वारा की जा रही जांच और अभियोजन की कार्रवाई को कानून के अनुरूप नहीं माना।

मामला 27 जुलाई 2026 को मालवीय चौक स्थित आरके डिजिटल एक्स-रे एवं सोनोग्राफी सेंटर तथा अधारताल स्थित सरल सोनोग्राफी सेंटर में स्वास्थ्य विभाग और पुलिस की संयुक्त जांच के बाद सामने आया था। पुलिस ने पीसीपीएनडीटी एक्ट के साथ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत भी प्रकरण दर्ज किया था। याचिकाकर्ताओं की ओर से तर्क दिया गया कि पीसीपीएनडीटी एक्ट की धारा 28 के तहत इस कानून से जुड़े अपराध में अदालत संज्ञान केवल निर्धारित प्राधिकारी की शिकायत पर ही ले सकती है। हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के डॉ. बृजपाल सिंह मामले में दिए निर्णय का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि पीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत जांच की जिम्मेदारी निर्धारित अधिकारी की है। पुलिस इस कानून के तहत मुख्य जांच एजेंसी के रूप में कार्रवाई नहीं कर सकती। हालांकि, उसी घटना में यदि भारतीय न्याय संहिता के तहत स्वतंत्र अपराध बनता है तो उसकी जांच पुलिस द्वारा जारी रखी जा सकती है।







