जर्जर आश्रम बंद, 21 दिन से घर पर 50 आदिवासी छात्राएं : छत का छज्जा गिरने के बाद बंद किया गया आश्रम, तीन सप्ताह बाद भी छात्राओं के लिए सुरक्षित ठिकाने की व्यवस्था नहीं कर सका प्रशासन

मंडला, निवास। निवास विकासखंड क्षेत्र अंतर्गत मानिकपुर स्थित वीरांगना रानी दुर्गावती कन्या बैगा आश्रम पिछले 21 दिन से बंद है। लगातार बारिश के कारण छात्रावास की छत पूरी तरह जर्जर हो गई और छत से प्लास्टर नीचे गिरने लगा, छात्राओं में भय का माहौल रहा, किसी तरह का हादसे का सामना नहीं करना पड़े इसे देखते हुए छात्रावास की अधीक्षक वन्दना तेकाम ने उच्च अधिकारियों को जानकारी दी। इसके बाद संभागायुक्त ने निवास बीईओ को छात्रावास बंद करने के निर्देश किए और छात्राओं के लिए तत्काल सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्था करने के निर्देश दिए।
लेकिन 21 अगस्त से छात्रावास बंद होने के बावजूद आज दिनांक तक वैकल्पिक व्यवस्थाएं नहीं बना गई। स्थिति यह है बैगा छात्राएं अपने घरो में है। इस लेटलतीफ ी के कारण अब पालकों में गहरा आक्रोश दिखाई दे रहा है। उनका कहना है कि प्रशासनिक लापरवाही के चलते आश्रम बदहाल अव्यवस्था पहुंच गया है। हर साल करोड़ो रूपए इन शासकीय भवनो के मरम्मत के लिए खर्च की जाती है इसके बाद भी भवनो के हाल दयनीय स्थिति में है। इससे छात्राओं का भविष्य दांव पर है। उनकी शिक्षा दीक्षा प्रभावित हो रही है।
आधा सैंकड़ा बैगा छात्राएं है दर्ज
कन्या आश्रम में 50 आदिवासी छात्राएं निवास करती हैं। शासन द्वारा उन्हें खाने से लेकर रुकने तक की सभी व्यवस्थाएं प्रदान की जाती हैं। लेकिन छात्रावास बंद होने के कारण सभी छात्राओं को अपने अपने घर जाना पड़ा है। अधीक्षक वन्दना तेकाम ने बताया कि छात्रावास भवन वर्ष 2007 में बना था। छात्रावास में लगभग 12 कमरे जिनमें एक रसोई घर, एक कार्यालय कक्ष और एक खाद्यान्न कक्ष शामिल है। शेष कमरों में 50 आदिवासी छात्राएं रहती थीं। लगातार बारिश के चलते अव्यवस्थाएं देखते हुए छात्राओं की सुरक्षा की दृष्टि से उन्हें घर भेजना पड़ा।
बिस्तर में लगी फफंद, कक्ष में दुर्गन्ध
गुरुवार को मानिकपुर कन्या आश्रम में फैली अव्यवस्था को देख अभिभावक दंग रह गए। बड़ी संख्या में अभिभावक मौके पर पहुंचे, क्योंकि छत का छज्जा गिरने के 20 दिन बीत जाने के बाद भी छात्राओं के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई थी। इस लापरवाही को लेकर अभिभावकों में आक्रोश नजर आया। अभिभावकों ने छात्रावास का निरीक्षण किया तो वहां की स्थिति देख वे दंग रह गए। उन्होंने देखा कि किस तरह छत का छज्जा टूटकर नीचे बिखरा पड़ा था। इतना ही नहीं बालिकाओं के कक्षों में रखे उनके बिस्तर और अन्य सामानों में फफंूद लगी हुई थी और कमरों से तेज़ दुर्गंध आ रही थी। अभिभावकों ने इस बदहाल स्थिति पर तत्काल कार्रवाई की मांग की।
पालको ने दी आंदोलन की चेतावनी
पालक लामू सिंह मरावी, लक्ष्मण सिंह उइके ने हॉस्टल में व्याप्त अव्यवस्थाओं पर गहरा रोष व्यक्त किया है। उनका कहना है कि यदि समय रहते मरम्मत कार्य किया जाता तो यह स्थिति नहीं आती। अभिभावकों ने आरोप लगाया कि प्रशासन की अनदेखी के कारण बच्चों की पढ़ाई गंभीर रूप से प्रभावित हो रही है, जबकि त्रैमासिक परीक्षाएं जल्द ही शुरू होने वाली हैं। उन्होंने बताया कि हॉस्टल में लगभग 30 से 40 किलोमीटर दूर से बालिकाए आकर रहते हैं, जिनकी शिक्षा का नुकसान हो रहा है। अभिभावकों का स्पष्ट कहना है कि प्रशासन की निष्क्रियता के चलते बच्चों का भविष्य अंधकारमय होता जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही हॉस्टल की व्यवस्थाएं दुरुस्त नहीं की गईं, तो उन्हें आंदोलन करने को बाध्य होना पड़ेगा।
इनका कहना है ..
आश्रम क्षतिग्रस्त होने की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियो को दी गई। मरम्मत कार्य के लिए स्वीकृति प्रक्रिया में टाइम लगेगा। अभी हमने दो शासकीय देखे है। कन्या शाला निवास और हाईस्कूल बिसौरा। जहां आश्रम शाला शिफ्ट किया जाएगा।
सुनील दुबे, बीईओ निवास







