कृषि विभाग में “योजनाओं के नाम पर बड़ा खेल”? बीज वितरण से लेकर RTI तक पर उठे गंभीर सवाल
फर्जी लाभार्थी, बीज घोटाला और सूचना छिपाने के आरोपों से घिरा विभाग, किसानों ने मांगी उच्च स्तरीय जांच

कृषि विभाग में “योजनाओं के नाम पर बड़ा खेल”? बीज वितरण से लेकर RTI तक पर उठे गंभीर सवाल
फर्जी लाभार्थी, बीज घोटाला और सूचना छिपाने के आरोपों से घिरा विभाग, किसानों ने मांगी उच्च स्तरीय जांच

कटनी, यशभारत जिले का कृषि विभाग इन दिनों गंभीर आरोपों के घेरे में है। किसानों और ग्रामीणों ने बीज वितरण से लेकर लाभार्थी चयन और सूचना के अधिकार (RTI) तक में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं और कथित भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए पूरे तंत्र की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले तीन वर्षों (2023-24, 2024-25 एवं 2025-26) में अनुदानित और निःशुल्क बीज वितरण योजनाएं केवल कागजों तक सीमित रह गई हैं। वास्तविकता में कई किसानों को न तो समय पर बीज मिला और न ही निर्धारित मात्रा। कई जगह अतिरिक्त राशि वसूलने तक की शिकायतें सामने आ रही हैं। वहीं, यह भी गंभीर आरोप है कि फर्जी लाभार्थी सूची तैयार कर बीजों का वितरण कागजी स्तर पर पूरा दिखाया गया, जबकि असली किसान योजना से वंचित रह गए।
मामला तब और विवादास्पद हो गया जब ग्राम गैंतरा निवासी किसान प्रमोद कुमार पटेल ने वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी, विकासखंड कटनी से सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 के तहत पिछले तीन वर्षों के बीज वितरण लाभार्थियों की सूची और संबंधित रिकॉर्ड मांगा। लेकिन लोक सूचना अधिकारी द्वारा आवेदन को “अत्यंत वृहद” और “अस्पष्ट” बताकर निरस्त कर दिया गया, जिससे पारदर्शिता पर सवाल और गहरे हो गए हैं।
किसान द्वारा कलेक्टर को दिए गए आवेदन में यह भी आरोप लगाया गया है कि विभाग में बीज वितरण की जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं कराई जाती और पूछताछ पर कई बार यह कहा जाता है कि बीज आवंटन ही नहीं हुआ। साथ ही ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों के मुख्यालय निवास और वास्तविक कार्यस्थल उपस्थिति पर भी सवाल उठाए गए हैं। इससे मकान किराया भत्ता (HRA) के कथित दुरुपयोग की आशंका भी जताई गई है।
आरटीआई कार्यकर्ताओं का कहना है कि सूचना देने के बजाय आवेदन को खारिज करना प्रशासनिक पारदर्शिता पर सीधा प्रहार है और यह संकेत देता है कि विभाग में जवाबदेही से बचने की प्रवृत्ति बढ़ रही है। उनका आरोप है कि यदि निष्पक्ष जांच कराई जाए तो बीज वितरण व्यवस्था, लाभार्थी चयन और भुगतान प्रणाली में बड़े स्तर की अनियमितताएं उजागर हो सकती हैं।
अब किसानों और ग्रामीणों की स्पष्ट मांग है कि पूरे मामले की उच्च स्तरीय, स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए, जिसमें बीज वितरण रिकॉर्ड, लाभार्थी सूची, RTI प्रकरण और अधिकारियों की तैनाती एवं उपस्थिति की वास्तविक स्थिति शामिल हो। साथ ही लंबित सूचना तत्काल उपलब्ध कराई जाए ताकि वास्तविक पात्र किसानों को उनका अधिकार मिल सके।
किसानों का कहना है कि यदि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होती है तो कृषि विभाग की कार्यप्रणाली की कई परतें खुल सकती हैं और यह स्पष्ट हो सकता है कि योजनाओं का लाभ वास्तव में किसानों तक पहुंच भी रहा है या केवल फाइलों में ही सिमट कर रह गया है।







