नरोत्तम पर दांव लगाकर भाजपा बड़ा खेल करने की तैयारी में ?
राज्यसभा की तीसरी सीट को हथियाने भाजपा कर रही चक्रव्यूह की रचना

कांग्रेस में भोपाल से दिल्ली तक हलचल, 4 – 5 विधायक डिगे तो हो जाएगा खेला
भोपाल,यशभारत। राजनीतिक पुनर्वास की प्रतीक्षा कर रहे नरोत्तम मिश्रा को राज्यसभा का उम्मीदवार बनाकर क्या भाजपा मध्यप्रदेश में कांग्रेस की एकमात्र राज्यसभा सीट को हथियाने का चक्रव्यूह बुन रही है ? सियासी गलियारों में तैर रहा यह सवाल आजकल कांग्रेस की नींद उड़ा रहा है। जून में होने जा रहे राजसभा चुनाव में विधानसभा सीटों के अंक गणित के हिसाब से भाजपा की दो सीटें कन्फर्म हैं, लेकिन दिग्विजय सिंह की रिक्त हो रही तीसरी सीट को भी भाजपा हथियाने की योजना पर काम कर रही है। इसके लिए उसे 10 वोटों की आवश्यकता होगी। कांग्रेस की असल चिंता यही है कि यदि उसके 6 विधायकों ने क्रॉस वोटिंग कर दी, या चुनाव के वक्त सदन में अनुपस्थित रहे तो बड़ा खेला हो जाएगा। कांग्रेस का यही डर भोपाल से लेकर दिल्ली के बड़े नेताओं को सता रहा है। भाजपा ने नरोत्तम मिश्रा पर दांव लगाना लगभग इसलिए तय कर लिया है क्योंकि नरोत्तम के मित्र कांग्रेस में भी मौजूद है। पार्टी को भरोसा है कि इस प्रभाव से वे कांग्रेस को पटखनी दे सकते हैं।
जून का माह जैसे जैसे करीब आ रहा है, एमपी का सियासी पारा हाई होता जा रहा है। इशारा तो यही है कि राज्यसभा की तीन सीटों का चुनाव दिलचस्प हो सकता है। भाजपा के लिए दो और कांग्रेस के लिए एक सीट सुरक्षित दिखाई दे रही थीं, लेकिन अब कांग्रेस को आसानी से मिल सकने वाली इस एक सीट का गणित रोचक बन रहा है।
यह है कांग्रेस की चिंता ..
गौरतलब है कि दतिया से विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता खत्म होने के बाद मध्यप्रदेश की 230 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस के 64 सदस्य रह गए हैं। पिछले दिनों सजा होने के बाद कोर्ट द्वारा विजयपुर विधायक मुकेश मल्होत्रा के वोट डालने पर रोक लगी हुई है। वहीं, बीना से विधायक निर्मला सप्रे के दलबदल का मामला भले ही विचाराधीन है, लेकिन वह भाजपा के ही साथ हैं। इस तरह कांग्रेस के पास केवल 62 वोट हैं। इसके अलावा भी कांग्रेस की चिंताएं कम नहीं है। एक विधायक अपनी प्रोफाइल में कांग्रेस का साइन हटाकर शासन का प्रतीक चिन्ह लगा चुके हैं, जबकि एक और विधायक भाजपा के एक मंत्री के करीबी हैं। विंध्य क्षेत्र के एक विधायक भी काफी समय से अनमने हैं। ये भाजपा के साथ हो गए तो ऐसी स्थिति में कांग्रेस बाउंड्रीलाइन पर आकर खड़ी हो जाती है। कांग्रेस को इन सदस्यों के क्रॉस वोटिंग का खतरा सता रहा है। सूत्र बताते हैं कि पार्टी नरोत्तम मिश्रा को इस खास वजह से सामने रख रही है। वे बहुत समय से अपने राजनीतिक पुनर्वास के इंतजार में दिल्ली की ओर ताक रहे है। भाजपा ने उन्हें गोपनीय तौर पर मैसेज दे दिया है कि अगर वे कांग्रेस के भीतर अपने राजनीतिक संबंधों का लाभ लेकर पार्टी के खाते में तीसरी सीट भी ले आने का गणित जमाते हैं तो पार्टी उनकी उम्मीदवारी को फौरन हरी झंडी दे देगी। सूत्र बताते हैं कि चार से पांच कांग्रेस विधायक भाजपा के संपर्क में बताए जा रहे हैं। एक विधायक भारत आदिवासी पार्टी का है। यदि कांग्रेस के तीन-चार विधायक क्रॉस वोटिंग कर दें तो भाजपा यह सीट जीत सकती है।
कांग्रेस के असंतोष का भी लाभ लेना चाहती है भाजपा
भाजपा कांग्रेस के आंतरिक असंतोष और विधायकों की संभावित क्रॉस वोटिंग का लाभ उठाकर राज्यसभा की तीसरी सीट पर भी कब्जा करने की योजना बना रही है। दिग्विजय सिंह के फिर चुनाव लड़ने से इनकार के बाद कांग्रेस में इस एक सीट के लिए मीनाक्षी नटराजन और कमलनाथ सहित कई अन्य दावेदारों के नाम चर्चा में हैं। पार्टी के भीतर दलित या आदिवासी चेहरे को भेजने की मांग भी उठ रही है। है।
नरोत्तम को इसलिए ‘इनाम’ ?
दरअसल, बीते विधानसभा और लोकसभा चुनावों के दौरान नरोत्तम मिश्रा ने संगठन के लिए ‘संकटमोचक’ की भूमिका निभाई है। 2023 विधानसभा और हालिया लोकसभा चुनावों में कांग्रेस के छोटे-बड़े हजारों नेताओं को भाजपा में शामिल कराने का श्रेय नरोत्तम मिश्रा को जाता है। भले ही वे 2023 का चुनाव हार गए हों, लेकिन ग्वालियर-चंबल और प्रदेश की राजनीति में उनका दखल कम नहीं हुआ है। भाजपा नेतृत्व चाहता है कि 2028 के अगले विधानसभा चुनाव से पहले नरोत्तम मिश्रा जैसे कद्दावर नेता को संवैधानिक पद देकर एक्टिव रखा जाए।
सवर्ण वर्ग की नाराजगी दूर करने का दांव
सवर्ण वर्ग की नाराजगी दूर करने के लिए भाजपा नरोत्तम मिश्रा का राज्यसभा भेजने का दांव चल सकती है। यह अलग बात है कि भाजपा का यह दांव जातिगत राजनीति में कितना कारगर साबित होता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नरोत्तम मिश्रा को राज्यसभा भेजकर सवर्णों के राजनीतिक गुस्से को ठंडा किया जा सकता है। फिर यूजीसी पर अब फैसला कोर्ट से आना है, जिसका सभी को इंतजार है।








