44 दुकानों के ठेके, 19 के लिए आज टेंडर, 453 करोड़ का टारगेट, अब तक 60 प्रतिशत राजस्व मिला आबकारी विभाग को, ठेकेदारों की अरूचि के चलते सरकार ने 15 प्रतिशत कम बोली की दी अनुमति

कटनी, यशभारत। एक अपै्रल से जिले में शराब का नया ठेका लागू होना है। अभी तक 44 दुकानों के टेंडर हो पाए हैं। आज नवमे चरण के अंतर्गत 19 दुकानों के लिए टेंडर प्रक्रिया को पूरा किया जा रहा है। इसमे 7 ग्रुप और कुछ सिंगल दुकानें शामिल है। आबकारी विभाग को उम्मीद है कि आज शेष बची 19 दुकानों के टेंडर हो जाएंगे। विदित हो कि कटनी जिले में वर्ष 2026-27 में 453 करोड़ राजस्व प्राप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। विभागीय सूत्रों की मानें तो आबकारी विभाग को अब तक 60 प्रतिशत राजस्व मिल चुका है। शराब दुकानों की लाइसेंस फीस में 20 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी किए जाने के बाद ठेकेदारों द्वारा ठेके लेने में रूचि नहीं दिखाई गई। जिसके बाद राज्य सरकार द्वारा लाइसेंस फीस में कमी करते हुए इसे 15 प्रतिशत कर दिया गया। जिसके बाद कटनी सहित पूरे प्रदेश में टेंडर की प्रक्रिया पूरी हो पाई, हालांकि अभी भी कटनी सहित कई जिलों में बड़ी संख्या में शराब दुकानों के टेंडर नहीं हो पाए हैं। कटनी की बात करें तो शेष बची 19 दुकानों के लिए आज टेंडर बुलाए गए हैं।
गौरतलब है कि जिले की 63 देशी-विदेशी शराब दुकानों की नीलामी के लिए फरवरी महीने में टेंडर प्रक्रिया शुरू की गई थी। सरकार ने हर साल की तरह इस साल भी लाईसेंस फीस में प्रतिशत की बढ़ोत्तरी की गई थी। वर्ष 2025-26 में सरकार को कटनी जिले से 378 करोड़ की कमाई हुई थी, इस बार इसको बढ़ाकर 453 करोड़ तय किया गया था। लाईसेंस फीस में 20 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी किए जाने के बाद शराब ठेकेदारों ने दुकानों के टेंडर लेने में रूचि नहीं दिखाई, जिसके चलते यह टेंडर प्रक्रिया नवमे चरण तक पहुंच गई। जिले में आज नवमे चरण के अंतर्गत टेंडर बुलाए गए हैं।
बची दुकानों के टेंडर चुनौती
बताया जाता है कि सरकार ने 2026-27 की नई नीति के तहत आरक्षित मूल्य में 20 प्रतिशत की वृद्धि की थी और 15 प्रतिशत कम तक की बोली की अनुमति दी थी। 1 अप्रैल से नया वित्तीय वर्ष शुरू होने जा रहा है, इससे पहले मध्यप्रदेश के आबकारी विभाग के सामने बड़ी चुनौती यह है कि सभी शराब दुकानों की नीलामी कैसे की जाए। पुराने नियमों के चलते ठेकेदारों ने इस प्रक्रिया से दूरी बना ली थी। शुरूआत में आबकारी विभाग की तरफ से पिछले की साल की तुलना में बेस प्राइस 20 फीसदी बढ़ाकर रखा था, लेकिन व्यापारियों ने इसमें कोई रुचि नहीं दिखाई थी।







