जबलपुरमध्य प्रदेश

यश भारत की खबर का असर… मझौली धान घोटाला मामले में एक और FIR, समाचार प्रकाशित होने के 24 घंटे के अंदर ही प्रशासन ने की कार्यवाही

जबलपुर यश भारत। बुधवार को यश भारत द्वारा मझौली धान घोटाले को लेकर समाचार प्रकाशित किया गया था, जिसमें बताया गया था कि मामले में प्रशासन द्वारा गोलमाल की प्रमुख कड़ी क्वालिटी सर्वेयर के ऊपर मामला दर्ज नहीं किया गया है, जबकि पूरे गोलमाल में सबसे पहले सर्वेयर की भूमिका महत्वपूर्ण थी। इसके बाद कलेक्टर राघवेंद्र सिंह द्वारा तत्काल संज्ञान लेते हुए समिति में तैनात सर्वेयर भूपेंद्र कुर्मी के खिलाफ मामला दर्ज करवाने का आदेश दिया और फिर गुरुवार को खाद्य विभाग द्वारा मझौली में भूपेंद्र के खिलाफ प्रतिवेदन देकर विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज करवाया गया। जबकि इसी मामले में 23 जनवरी को पहले FIR दर्ज की गई थी। इसके बाद दो माह से अधिक का समय बीत गया था, लेकिन सर्वेयर के खिलाफ कोई भी कार्रवाई नहीं हो रही थी, जिसके पीछे राजनीतिक संरक्षण वजह बताई जा रही थी। लेकिन यश भारत में समाचार प्रकाशित होने के तत्काल बाद प्रशासन द्वारा उक्त सर्वेयर के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया। साथ ही तत्काल प्रभाव से मझौली पुलिस द्वारा तत्परता दिखाते हुए भूपेंद्र कुर्मी को गिरफ्तार भी कर लिया गया है।

समिति प्रबंधक को कौन बचा रहा

एक तरफ जहां इस पूरे मामले में उपार्जन की पहली कड़ी सर्वेयर के ऊपर 2 महीने के बाद मामला दर्ज कर लिया गया है, वहीं अभी भी उपार्जन की आखिरी और सबसे महत्वपूर्ण कड़ी समिति प्रबंधक के खिलाफ कोई भी कार्रवाई नहीं हुई है। जानकारी के अनुसार इस पूरे मामले में समिति प्रबंधक अखिलेश भट्ट की भूमिका भी सबसे महत्वपूर्ण है, क्योंकि आखिरी एंट्री समिति प्रबंधक के बायोमेट्रिक या आधार OTP से होती है। जबकि इस मामले में जितनी भी फर्जी एंट्री हुई हैं, वह सभी अखिलेश भट्ट के आधार लिंक वेरिफिकेशन से हुई हैं। ऐसे में इसके ऊपर कार्रवाई ना करना प्रशासन की मंशा पर सवाल खड़े करता है। वहीं दूसरी तरफ केंद्र में मौजूद नोडल अधिकारी को लेकर भी प्रशासन खामोश है, जबकि इस केंद्र में बड़ी मात्रा में टोकन का वेरिफिकेशन OTP से हुआ है। जबकि प्रशासन द्वारा बायोमेट्रिक को अनिवार्य किया गया था। यदि OTP के माध्यम से वेरिफिकेशन होता है, तो इसके लिए नोडल को SDM से अनुमति लेनी होगी। जबकि किसान मौके पर मौजूद था ही नहीं, तो फिर नोडल द्वारा कैसे OTP से वेरिफिकेशन की अनुमति दे दी गई। ये सभी सवाल अभी भी अनसुलझे हैं और कुछ प्रमुख प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका को सवालों के घेरे में खड़े करते हैं। जिन्होंने पूरे मामले की जांच करी है और 23 जनवरी को सिर्फ दो लोगों पर मामला दर्ज करवाया है जबकि कई प्रमुख भ्रष्टाचारी अभी भी बाहर है।

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