भोपालमध्य प्रदेश

पूर्व सैनिकों के मुद्दों को लेकर सरकार पर सवाल, विकलांगता पेंशन पर टैक्स हटाने और ECHS व्यवस्था सुधारने की मांग

पूर्व सैनिकों के मुद्दों को लेकर सरकार पर सवाल, विकलांगता पेंशन पर टैक्स हटाने और ECHS व्यवस्था सुधारने की मांग

पत्रकार वार्ता में उठाए गए पूर्व सैनिकों से जुड़े गंभीर मुद्दे, सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की अपील

यश भारत भोपाल। पूर्व सैनिकों से जुड़े महत्वपूर्ण और संवेदनशील मुद्दों को लेकर आयोजित पत्रकार वार्ता में सरकार से कई अहम मांगें उठाई गईं। वक्ताओं ने कहा कि देश की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले सैनिकों के साथ हो रही अनदेखी बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और यह उन वीर सपूतों के सम्मान के खिलाफ है जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित किया।
पत्रकार वार्ता में मुख्य रूप से दो प्रमुख मुद्दों को उठाया गया, जिनमें विकलांगता पेंशन पर कर लगाने का निर्णय और पूर्व सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना ECHS की बदहाल स्थिति शामिल है। वक्ताओं ने कहा कि भारतीय सेना देश की गरिमा, शौर्य और आत्मसम्मान का प्रतीक है। 1948, 1962, 1965 और 1971 के युद्धों से लेकर कारगिल और अन्य सैन्य अभियानों तक भारतीय सैनिकों ने अपने प्राणों की बाजी लगाकर देश का गौरव बढ़ाया है।

इन युद्धों में कई सैनिक गंभीर रूप से घायल हुए, अपने अंग गंवाए और आजीवन विकलांगता का दर्द सहते हुए भी राष्ट्र सेवा की भावना बनाए रखी।‌पत्रकार वार्ता में कहा गया कि विकलांगता पेंशन कोई आय नहीं बल्कि देश के लिए हुई शारीरिक क्षति की क्षतिपूर्ति है। वर्ष 1922 में बने आयकर कानून के तहत सैनिकों की विकलांगता पेंशन को कर मुक्त रखा गया था, लेकिन अब इस पर कर लगाए जाने का निर्णय लिया गया है, जो पूर्व सैनिकों के अनुसार बेहद असंवेदनशील और उनके बलिदान का अपमान है। पूर्व सैनिकों की ओर से मांग की गई कि विकलांगता पेंशन पर लगाया गया कर तत्काल वापस लिया जाए और सरकार पूर्व सैनिकों के सम्मान और अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करे। इसके अलावा पत्रकार वार्ता में पूर्व सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना ECHS की स्थिति पर भी चिंता जताई गई। बताया गया कि यह योजना रक्षा मंत्रालय के तहत पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों को कैशलेस और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा देने के उद्देश्य से बनाई गई है। सेवानिवृत्ति के समय सैनिक इस योजना के लिए एकमुश्त अंशदान भी देते हैं, ताकि उन्हें जीवनभर चिकित्सा सुविधा मिल सके।

हालांकि, वर्ष 2025 के अंत से इस योजना के क्रियान्वयन में गंभीर समस्याएं सामने आ रही हैं। चिकित्सा बिलों की प्रतिपूर्ति में महीनों की देरी हो रही है। बजट आवंटन में कमी और कई निजी अस्पतालों के योजना से बाहर हो जाने के कारण पूर्व सैनिकों को इलाज के लिए अपनी जेब से खर्च करना पड़ रहा है। इसके साथ ही जटिल दस्तावेज प्रक्रिया, लंबी सत्यापन प्रक्रिया और कई मामलों में दावों की अस्वीकृति जैसी समस्याएं भी सामने आ रही हैं। वक्ताओं ने कहा कि जिन सैनिकों ने अपनी युवावस्था देश की सेवा में बिताई, उन्हें बीमारी के समय इस तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। पत्रकार वार्ता में सरकार से मांग की गई कि ECHS योजना के लिए पर्याप्त बजट आवंटित किया जाए, चिकित्सा बिलों की प्रतिपूर्ति प्रक्रिया को सरल और तेज बनाया जाए तथा अधिक से अधिक अस्पतालों को इस योजना से जोड़ा जाए, ताकि पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों को समय पर और बेहतर उपचार मिल सके।

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