गोटेगांव, नरसिंहपुर। जिले के मुंगवानी थाना क्षेत्र के अंतर्गत अमृत सरोवर निर्माण और तालाब गहरीकरण कार्यों में बड़े पैमाने पर हुए भ्रष्टाचार और कूटरचना के मामले में न्यायालय ने सख्त रुख अपनाया है। माननीय प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश नीतिराज सिंह सिसौदिया ने दो अलग-अलग प्रकरणों की सुनवाई करते हुए सरपंच, सचिव, उपयंत्री और रोजगार सहायक सहित कुल नौ आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिकाएं निरस्त कर दी हैं।
मामले के अनुसार, श्रीकृष्ण कंस्ट्रक्शन के संचालक शशिकांत सिरवैया ने पुलिस अधीक्षक को शिकायत दर्ज कराई थी कि उनकी फर्म ने ग्राम पंचायत पस्ताना के पिंडरई और ग्राम पंचायत कटकुही में अमृत सरोवर निर्माण हेतु मशीनरी उपलब्ध कराई थी।
नियमानुसार इसके भुगतान हेतु बिल प्रस्तुत किए गए थे, लेकिन जनपद और ग्राम पंचायत के जिम्मेदार पदाधिकारियों ने षड्यंत्र रचकर पोर्टल से असली बिलों को हटा दिया और फर्जी बिलों के माध्यम से शासकीय धनराशि का आहरण कर लिया।
पुलिस जांच में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ कि आरोपियों ने अवैध लाभ प्राप्त करने की मंशा से न केवल फर्जी बिल लगाए, बल्कि फर्जी मस्टर रोल और कूटरचित माप पुस्तिका भी तैयार की। थाना मुंगवानी में दर्ज अपराध क्रमांक 371/2025 और 372/2025 के तहत पुलिस ने आरोपियों पर धोखाधड़ी, दस्तावेजों की कूटरचना और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत मामला पंजीबद्ध किया है।
न्यायालय ने दोनों मामलों की गंभीरता को देखते हुए के.के. अग्रवाल (उपयंत्री),शिवराज सिंह कौरव (सब इंजीनियर),नीलेश मेहरा (रोजगार सहायक, कोसमखेड़ा),तीरथ प्रसाद डेहरिया (सचिव, लिघारी),अनवर खान (सचिव, पस्ताना),मथुरा प्रसाद मेहरा (सरपंच, लिघारी),संतोष कुमार अहिरवार (सरपंच, पस्ताना),प्रदीप साहू (व्यापारी/मटेरियल सप्लायर) – (दोनों प्रकरणों में आरोपी),अज्ञात/अन्य संबंधित आरोपी (प्रकरण क्रमांक 372 में उल्लेखित अन्य नाम) इन नौ आरोपियों को अग्रिम राहत देने से इनकार कर दिया।
गंभीर है शासकीय धन का दुरुपयोग
सुनवाई के दौरान राज्य की ओर से अपर लोक अभियोजक शैलेष पुरोहित एवं आपत्तिकर्ता की ओर से अनंत कुमार गुप्ता अधिवक्ता ने जमानत का कड़ा विरोध करते हुए इसे शासन को आर्थिक हानि पहुंचाने वाला गंभीर अपराध बताया। माननीय न्यायाधीश नीतिराज सिंह सिसौदिया ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि प्रथम दृष्टया यह मामला केवल भुगतान के विवाद का नहीं है, बल्कि शासकीय अभिलेखों में हेरफेर और फर्जी मस्टर रोल तैयार कर सार्वजनिक धन के गबन का है। अपराध की प्रकृति अत्यंत गंभीर होने के कारण सभी आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिकाएं खारिज कर दी गईं।
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