सूर्य उपासना के महापर्व छठ की तैयारियां चरम पर
सरोवरों में सजने लगी बेदियां, आस्था और पर्यावरण का अनोखा संगम

जबलपुर (यश भारत)। लोक आस्था, प्रकृति और पर्यावरण की पवित्र भावना से ओतप्रोत सूर्य उपासना का चार दिवसीय महापर्व छठ इस बार भी संस्कारधानी जबलपुर में बड़े उल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा। पर्व की शुरुआत शनिवार, 25 अक्टूबर को “नहाय-खाय” से होगी, जबकि 26 अक्टूबर को खरना, 27 अक्टूबर को संध्या अर्घ्य और 28 अक्टूबर को प्रातःकालीन अर्घ्य के साथ व्रत का समापन किया जाएगा।
सूर्य को समर्पित आस्था का महापर्व
छठ पर्व भारतीय संस्कृति का वह पर्व है जिसमें सूर्य देव और छठी मइया की पूजा की जाती है। यह पर्व केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि प्रकृति, जल और पर्यावरण के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक भी है। व्रती महिलाएँ नदी या सरोवर के तट पर निर्जला व्रत रखकर अस्ताचल और उदयमान सूर्य को अर्घ्य अर्पित करती हैं, जिससे जीवन में सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य की कामना की जाती है। इस पर्व में स्वच्छता, सात्विकता और संयम का विशेष महत्व है। लोग अपने घरों व घाटों की सफाई करते हैं और पूजन सामग्री को प्राकृतिक रूप में तैयार करते हैं।
नर्मदा घाटों से लेकर तालाबों तक तैयारियां पूरी रफ़्तार पर

छठ पर्व की तैयारियों के तहत शहर के प्रमुख घाटों और जलाशयों — गौरीघाट, तिलवारा, भटौली, हनुमानताल, अधारताल, गोकलपुर, कंचनपुर, मानेगांव, संजीवनी नगर व रांछी एसएफ तालाब — पर श्रद्धालु बेदियां (अर्घ्य स्थलों) का निर्माण कर रहे हैं।
एक ओर प्रशासन द्वारा सफाई, प्रकाश और सुरक्षा की व्यवस्थाएं की जा रही हैं, वहीं दूसरी ओर श्रद्धालु अपनी ओर से साज-सज्जा और पूजा स्थल निर्माण में जुटे हैं घाटों पर जगह-जगह सामाजिक संगठनों द्वारा सहायता शिविर, पेयजल और प्राथमिक चिकित्सा केंद्र भी लगाए जा रहे हैं।
लोक परंपरा का विस्तार और आधुनिकता का मेल
यद्यपि छठ पर्व की उत्पत्ति उत्तर प्रदेश और बिहार की लोक संस्कृति में हुई, परंतु आज यह पर्व पूरे भारत में समान श्रद्धा से मनाया जाता है। जबलपुर में भी बड़ी संख्या में यूपी-बिहार से जुड़े परिवार रहते हैं, जिन्होंने इस परंपरा को यहां की संस्कृति का अभिन्न हिस्सा बना दिया है। सूर्य उपासना का यह पर्व सामाजिक एकता, पर्यावरण संरक्षण और पारिवारिक सौहार्द का संदेश देता है। प्रकृति की पूजा के माध्यम से मनुष्य और पर्यावरण के संबंधों को मजबूत करने वाला यह त्योहार आज वैश्विक स्तर पर भी प्रासंगिक होता जा रहा है।

सच्ची निष्ठा और स्वच्छता से जुड़ा पर्व
छठ पर्व की सबसे बड़ी विशेषता है — बिना किसी दिखावे के आस्था की सादगी। मिट्टी की वेदियां, बांस की टोकरी, दीये, फल-फूल और घर में बने प्रसाद इस पर्व को “प्राकृतिक पूजा” का स्वरूप देते हैं। संस्कारधानी के हर तालाब और घाट पर इस समय भक्ति, सेवा और स्वच्छता की लहर दिखाई दे रही है। महिलाएं पारंपरिक गीत गा रही हैं, बच्चे उत्साह में भाग ले रहे हैं और पुरुषजन घाटों की सफाई में लगे हुए हैं। संस्कारधानी जबलपुर में छठ पर्व न केवल धार्मिक आयोजन है, बल्कि यह लोक जीवन की परंपराओं, अनुशासन, आस्था और पर्यावरण चेतना का सजीव उदाहरण बन चुका है।







