भोपालः शेफ की सड़क हादसे में मौत, 3 दिन तक शव मोर्चरी में पड़ा रहा
परिजनों को पुलिस ने नहीं दी गई सूचना

भोपालः शेफ की सड़क हादसे में मौत, 3 दिन तक शव मोर्चरी में पड़ा रहा
परिजनों को पुलिस ने नहीं दी गई सूचना
भोपाल, यशभारत: राजधानी की पिपलानी पुलिस एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में आ गई है। अयोध्या नगर क्षेत्र में रहने वाले एक शेफ राम बहादुर (55) की 19 अक्टूबर की रात रत्नागिरी में सड़क हादसे में मौत हो गई। इसके बावजूद पुलिस ने उनकी शिनाख्त करने में भारी लापरवाही बरती, जिसके चलते उनका शव तीन दिन तक गांधी मेडिकल कॉलेज की मोर्चरी में अज्ञात के रूप में पड़ा रहा और सड़ने लगा।
मिली जानकारी के अनुसार 19-20 अक्टूबर की दरमियानी रात करीब 1:30 बजे राम बहादुर, जो रत्नागिरी के एक रेस्टोरेंट में शेफ थे, अपनी स्कूटी से घर लौट रहे थे, तभी एक अन्य वाहन से उनकी टक्कर हो गई और मौके पर ही उनकी मौत हो गई।
परिजनों के गंभीर आरोप:
पहचान पत्र और मोबाइल मिला था: मृतक की स्कूटी की डिक्की में उनका मोबाइल फोन और आधार कार्ड मौजूद था, लेकिन पुलिस ने डिक्की खोलकर तलाशी नहीं ली। परिजनों का आरोप है कि स्कूटी का रजिस्ट्रेशन उसी पते पर था जहां वे रहते हैं, लेकिन पुलिस ने वाहन के रजिस्ट्रेशन के आधार पर भी उन्हें सूचित करने का कोई प्रयास नहीं किया।
मृतक के भाई नीमकांत बहादुर ने बताया कि जब उन्हें सूचना मिली, तब भी मोबाइल फोन ऑन था और उसमें परिवार सहित कई लोगों के मिस्ड कॉल थे, लेकिन पुलिस को उसकी ‘रिंग सुनाई नहीं दी’।
बेटे सतीश ने बताया कि दीवाली और व्यस्तता के कारण वे 22 अक्टूबर को पिता की गुमशुदगी दर्ज कराने जा रहे थे, तभी पुलिस ने उन्हें मौत की सूचना दी। उनका सवाल है, “पुलिस ने समय पर रजिस्ट्रेशन के आधार पर हमें सूचना क्यों नहीं दी? एक तो पिता की मौत हुई, अब उनका शव भी चार दिन बाद खराब हालत में मिला है।”
पिपलानी टीआई चंद्रिका यादव ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि मृतक के पास से कोई ऐसा दस्तावेज नहीं मिला जिससे तुरंत शिनाख्त हो सके। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि परिजनों ने तीन दिन तक गुमशुदगी दर्ज नहीं कराई थी। टीआई के अनुसार, पुलिस टीम ने फोटो दिखाकर पहचान कराई, जिसके बाद गुरुवार को शिनाख्त हुई और शव का पीएम कराया गया।







