भोपाल में आदिवासी बस्ती हटाने पर भारी हंगामा: पुलिस का लाठीचार्ज, बिलखते रहे छात्र और बुजुर्ग

भोपाल में आदिवासी बस्ती हटाने पर भारी हंगामा: पुलिस का लाठीचार्ज, बिलखते रहे छात्र और बुजुर्ग
भोपाल, यशभारत। राजधानी के मानस भवन के पीछे स्थित आदिवासी बस्ती को हटाने की कार्रवाई ने शनिवार को हिंसक रूप ले लिया। करीब 8 घंटे चली लंबी कार्रवाई के बाद जब रहवासियों को अपने घर टूटने का अहसास हुआ, तो वे पुलिस और नगर निगम की टीम से भिड़ गए। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया और कांग्रेस कार्यकर्ताओं समेत कई लोगों को हिरासत में ले लिया।
इस कार्रवाई के दौरान मानवीय संवेदनाओं को झकझोर देने वाले दृश्य सामने आए। बस्ती में रहने वाली एक छात्रा, जिसे कल नीट (NEET) की परीक्षा देनी है, रोते हुए अपने दबे हुए दस्तावेजों को ढूंढती रही। छात्रा ने प्रशासन पर सवाल उठाते हुए कहा कि उसके भविष्य के कागजात मलबे में दब चुके हैं और उसे समझ नहीं आ रहा कि वह कल परीक्षा कैसे देगी। वहीं, 103 साल की एक बुजुर्ग महिला भी अपने घर के टूटे ताले और गायब सामान को देख रोती नजर आईं।
बस्ती की महिलाओं ने मुख्यमंत्री को सीधे संवाद की चुनौती दी है। एक महिला ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार एक किलो गेहूं देकर चोरी-छिपे सर्वे कराती है और फिर अचानक घर उजाड़ देती है। उन्होंने बच्चों की पढ़ाई और परीक्षा की जिम्मेदारी लेने की मांग की। रहवासियों का विशेष विरोध निषादराज मंदिर को लेकर भी है, जिसे वे भोपाल में अपनी आस्था का इकलौता केंद्र बताते हैं।
दूसरी ओर, जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई विस्थापन योजना का हिस्सा है। प्रभावित परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मालीखेड़ी स्थित पक्के फ्लैटों में शिफ्ट किया जा रहा है। प्रशासन के अनुसार, इन 1-BHK फ्लैटों की कीमत लगभग 12 लाख रुपए है, जिनमें रहने के लिए सभी आधुनिक सुविधाएं दी गई हैं। फिलहाल क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात है और तनावपूर्ण शांति बनी हुई है।







