कटनीमध्य प्रदेश

जिला पंचायत उपाध्यक्ष की शिकायतों के बाद कटनी से हटाए गए डीईओ पृथ्वी पाल सिंह, स्कूल शिक्षा विभाग ने जबलपुर किया तबादला

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कटनी, यश भारत। अपनी पद स्थापना के बाद से ही कटनी जिले में लगातार विवादों में रहने वाले प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी पृथ्वीपाल सिंह को आखिरकार राज्य सरकार ने हटा दिया है। उन्हें जबलपुर जिले में कार्यालय संयुक्त के पद पर पदस्थ किया गया है हालांकि अभी तक उनके स्थान पर कटनी में किसी भी जिला शिक्षा अधिकारी की पोस्टिंग नहीं की गई है। ऐसा माना जा रहा है कि आज शाम या कल तक नए जिला शिक्षा अधिकारी की पद स्थापना कर दी जाएगी। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि जिला शिक्षा अधिकारी पृथ्वी पाल सिंह कटनी जिले में अपना 3 साल का निर्धारित समय भी पूरा कर चुके थे लेकिन ऊपर तक पहुंच होने के कारण उन्हें हटाया नहीं जा रहा था। कटनी में पिछले 3 साल के दौरान शिक्षा विभाग में हुई अनियमितताओं की शिकायत जबलपुर से लेकर राजधानी तक पहुंची थी। जिला पंचायत कटनी के उपाध्यक्ष अशोक विश्वकर्मा ने भी वित्तीय अनियमितताओं की शिकायत राज्य सरकार से की थी। स्थानीय स्तर पर भी जनप्रतिनिधियों से लेकर कर्मचारी संगठनों द्वारा शिकायतों के माध्यम से उन्हें हटाये जाने की मांग की जा रही थी। इन शिकायतों पर जांच भी हुई लेकिन इसके बाद भी उन्हें हटाए जाने की कार्रवाई नहीं की जा रही थी। आखिरकार शिकायतों के बाद राज्य सरकार को उन्हें यहां से हटाने के लिए मजबूर होना पड़ा।कटनी। अपनी पद स्थापना के बाद से ही कटनी जिले में लगातार विवादों में रहने वाले प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी पृथ्वीपाल सिंह को आखिरकार राज्य सरकार ने हटा दिया है। उन्हें जबलपुर जिले में कार्यालय संयुक्त के पद पर पदस्थ किया गया है हालांकि अभी तक उनके स्थान पर कटनी में किसी भी जिला शिक्षा अधिकारी की पोस्टिंग नहीं की गई है। ऐसा माना जा रहा है कि आज शाम या कल तक नए जिला शिक्षा अधिकारी की पद स्थापना कर दी जाएगी। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि जिला शिक्षा अधिकारी पृथ्वी पाल सिंह कटनी जिले में अपना 3 साल का निर्धारित समय भी पूरा कर चुके थे लेकिन ऊपर तक पहुंच होने के कारण उन्हें हटाया नहीं जा रहा था। कटनी में पिछले 3 साल के दौरान शिक्षा विभाग में हुई अनियमितताओं की शिकायत जबलपुर से लेकर राजधानी तक पहुंची थी। जिला पंचायत कटनी के उपाध्यक्ष अशोक विश्वकर्मा ने भी वित्तीय अनियमितताओं की शिकायत राज्य सरकार से की थी। स्थानीय स्तर पर भी जनप्रतिनिधियों से लेकर कर्मचारी संगठनों द्वारा शिकायतों के माध्यम से उन्हें हटाये जाने की मांग की जा रही थी। इन शिकायतों पर जांच भी हुई लेकिन इसके बाद भी उन्हें हटाए जाने की कार्रवाई नहीं की जा रही थी। आखिरकार शिकायतों के बाद राज्य सरकार को उन्हें यहां से हटाने के लिए मजबूर होना पड़ा।

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