
जबलपुर यश भारत। नयी शराब नीती की लागू होने और और नये ठेका होने को 2 महीने से ज्यादा का समय हो रहा है लेकिन इन दो महीना में शराब को लेकर जिस तरह की सुर्खियां बनी इसके पहले शायद ही कभी ऐसा हुआ हो कभी निर्धारित दाम से ज्यादा मूल्य पर शराब की बिक्री को लेकर तो कभी अवैध शराब की तस्करी और कारोबार को लेकर आबकारी विभाग चर्चाओं में रहा। अब तो स्थिति यहां तक पहुंच गई है कि सीएम हेल्पलाइन तक में शराब से जुड़े मामलों की शिकायत की जा रही हैं। सूत्रों की मांने पिछले दो महीने में करीब 500 से ज्यादा से शिकायत शराब को लेकर सीएम हेल्पलाइन में की गई है। सूत्रों से मिला यह आंकड़ा पूरे प्रदेश का है इसमें से जबलपुर की कितनी शिकायतें हैं यह तो अभी स्पष्ट जानकारी नहीं लग पाई है लेकिन पिछले दो महीना में शराब की धंधे को लेकर जो कुछ भी हुआ उसे इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता की इन शिकायतों में बड़ी संख्या जबलपुर की भी होगी। शिकायतों में आबकारी विभाग की कार्य प्रणाली पर भी सवालिया निशान लगाये गए हैं। शराब की ओवर रेटिंग को लेकर कुछ लोगों का तो यह भी मानना है कि यह एक संगठित आर्थिक शोषण है जो खुलेआम किया जा रहा है और आबकारी उदासीन बना हुआ है। या यू कहे की यह पूरा नेटवर्क आबकारी विभाग के संरक्षण में चल रहा है। यदि सिर्फ जबलपुर जिले की बात की जाए तो यहां पर अवैध शराब तस्करी और बिक्री के मामले तेजी से सामने आए हैं जिन पर अंकुश लगा पाने में आबकारी विभाग पूरी तरह से नाकाम साबित हुआ है। अवौध शराब के गोरखधंधे को लेकर ठेकेदारों और आगे शराब की सौदागरों के बीच न केवल टकराव हुआ बल्कि मारपीट की घटनाएं तक सामने आ चुकी है। पड़ोसी जिलों से बड़ी मात्रा में शराब की तस्करी हो रही है शहर से लेकर गांव गांव तक अब शराब कारोबारियों का नेटवर्क फैला है और गांव-गांव में देसी अंग्रेजी से लेकर कच्ची शराब का गोरख धंधा भी बेरोक-टोक चल रहा है यहां तक की प्रतिबंधित नर्मदा क्षेत्र में भी खुले आम अवैध शराब की बिक्री के कयी वीडियो पिछले दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हुए लेकिन आबकारी अमला चुप्पी साधे बैठा है जो कहीं ना कहीं यह सारा भी करता है कि यह सब कुछ संगामित्ती के चलते ही हो रहा है।
साहब खुद नहीं चाहते एमआरपी पर बिके शराब
शराब कारोबार से जुड़े सूत्रों की मांने तो जिले में आबकारी विभाग की कमान संभालने वाले साहब खुद नहीं चाहते कि ठेकेदार एमआरपी पर शराब बेचे इसके पीछे उनका अपना गुणा गणित है। ओवर रेटिंग को लेकर आए दिन आने वाले विवादों के बाद खुद कलेक्टर ने गोपनीय स्टिंग ऑपरेशन चलवाया और ओवर रेटिंग मिली भी लेकिन ऐसा नहीं है कि इसकी जानकारी आबकारी विभाग के मुखिया को नहीं थी। साहब की कार्यप्रणाली से आजिज आकर कुछ ठेकेदारों ने तो बाकायदा बोर्ड लगाकर एमएसपी पर शराब बेचना शुरू कर दिया था यह साहब को रास नहीं आया और आनन फानन ठेकेदारों की क्लास लगाकर हिदायत दी गई की एमआरपी से कम कीमत पर शराब ना बेचे अब इसके पीछे क्या कारण है यह तो साहब ही बता सकते हैं यदि ठेकेदार साहब की नहीं मानता तो उसे तरह-तरह से परेशान किया जाने लगता है। ठेकेदारों के प्रति भी साहब का दोहरा रवैया है कुछ ठेकेदार जहां उनके कृपा पात्र होने के कारण चांदी काट रहे हैं तो कुछ को साहब के कोपभाजन का शिकार होना पड़ता है और कहीं ना कहीं इसके पीछे मिलने वाले नजराने का खेल है।







