क्रिकेट छोडक़र फिटनेस की पकड़ी राह , बने शाटपुट के अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी, अब देश के लिए पदक जीतने का सपना
Leaving cricket, he took the path of fitness, became an international shot put player, now dreams of winning a medal for the country

क्रिकेट छोडक़र फिटनेस की पकड़ी राह , बने शाटपुट के अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी, अब देश के लिए पदक जीतने का सपना
*एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे भोपाल के समरदीप
* अंतरराष्ट्रीय स्पर्धा में देश के लिए पदक जीतने का है सपना
* देश में सबसे लंबी दूर तक शाटपुट फेंकने वाले खिलाड़ी बने
भोपाल, यशभारत। यदि किसी लक्ष्य को पाने के लिए सच्ची लगन व मेहनत से प्रयास किया जाए तो लक्ष्य को आसानी से प्राप्त किया जा सकता है। यह कहावत मप्र राज्य एथलेटिक्स खिलाड़ी समरदीप सिंग गिल पर सटीक बैठती है। महज 23 साल की उम्र में समरदीप एथलेटिक्स के शाटपुट यानि गोला फेंक इवेंट में देेश के नंबर दो खिलाड़ी बन गए हैं। अब उनकी नजर 27 मई से दक्षिण कोरिया के गुमी में होने वाली एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप के पदक पर जमी हुई है। पदक पाने के लिए समरदीप सिंह रोजाना पांच घंटे अभ्यास कर रहे हैं। हाल ही में समरदीप ने फेडरेशन कप में 19.34 मीटर शाटपुट फेंककर स्वर्ण पदक जीता था जिसके बाद एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप के लिए क्वालीफाइ किया। खास बात यह है कि उन्होंने पूर्व एशियाई रिकार्डधारक तजिंदर पाल सिंह तूर को हराया। उन्होंने 20 मीटर तक गोला फेंकने का लक्ष्य तय किया है। कोरिया के लिए रवाना होने के पूर्व यशभारत ने समरदीप से खास मुलाकात।

क्रिकेट छोडक़र शाटपुट थामा
समरदीप की शाटपुट खेल में आने की कहानी बहुत दिलचस्प हैँ उन्होंने बताया कि वे पहले क्रिकेट खेला करते थे, इसी दौरान कोच मिले जो पापा के दोस्त भी थे। उन्होंने पापा से कहा कि मैं इसे फिट कर दूंगा। फिर कोच साहब ने गोला फेंक का अभ्यास शुरू कराया। धीरे धीरे गोला फेंक के प्रति रुझान बढ़ता गया। समरदीप सिंह का कहना है कि शाटपुट ताकत का खेल है इसके लिए डायट का भी ख्याल रखना होता है।
माता पिता की प्रेरणा से बने खिलाड़ी
समरदीप ने बताया कि उनकी सफलता के पीछे उनके परिवारजनों का बड़ा हाथ है। माता पिता की प्रेरणा से खेल में आगे आया। माता पिता और कोच ने मेरे लिए पिलर का काम किया। हर मोड पर साथ खड़े रहे।

दिन में तीन बार करना पड़ता है अभ्यास
पदक पाने के लिए समरदीप को एक दिन में तीन तीन बार अभ्यास करना पड़ता है। कोच के संदीप सिंह द्वारा वर्कआउट बताया जाता है। जिसके आधार पर अभ्यास करना पड़ता है इसमें वेट ट्रेनिंग और तकनीकी अभ्यास भी करना होता है। शेड्यूल के मुताबिक ही दिनचर्या निर्धारित करते हैं।
खिलाडय़िों की सुविधाओं का रखा जाता है पूरा ख्याल
समरदीप ने बताया कि जो भी खिलाड़ी अपना भविष्य संवारना चाहते हैं वे मप्र राज्य खेल अकादमी और स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया में शामिल हो सकते हैं। सभी तरफ की सुविधाएं खिलाडय़िों को मुहैया कराई जाती हैं। इसके लिए ट्राइल भी ली जाती है। चयन प्रकिया के बाद विशेषज्ञों की निगरानी में अभ्यास कराया जाता है।
सेहत का नशा करो, स्वास्थ्य रहो
युवाओं को संदेश समरदीप ने दिया है। उनका कहना है कि युवा नशे से दूर रहे। नशे से कुछ हासिल नहीं होगा बल्कि कई तरह की बीमारियों से ग्रसित हो जाओगे। नशा करना है तो सेहत का करो, स्वास्थ्य रहो। स्वास्थ्य शरीर ही हमारी पूंजी है। किसी भी तरह का नशा आपको गर्त में ही डालेगा।
देश के लिए पदक जीतने का सपना
दक्षिण कोरिया के बाद जर्मनी में होने वाली अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में शामिल होंगे। समरदीप का कहना है कि हमे सपने देखने चाहिए और पूरा करने के लिए प्रयास करना चाहिए। सफलता जरूर मिलेगी।
हमारे लिए गर्व की बात है
समरदीप देश के लिए पदक जरूर जीतेगा यह हम सभी का विश्वास है। मप्र सरकार और खेल अकादमी की ओर से खिलाडय़िों का पूरा ख्याल रखा जा रहा है। इसी का परिणाम है कि खिलाड़ी अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं । हमारी लड़कियों ने भी कई पदक हासिल किए हैं। सफलता पाने के लिए लगातार अभ्यास और संतुलित आहार, मार्गदर्शन बहुत जरूरी होता है।
.. शिप्रा मसीह, एथलेटिक्स कोच







