विश्व पर्यावरण दिवस पर बीएमएचआरसी में विशेष आयोजन प्रकृति आधारित समाधान जलवायु संकट से निपटने का प्रभावी माध्यम डॉ. राजनारायण तिवारी
Special event at BMHRC on World Environment Day Nature-based solutions are an effective way to tackle the climate crisis. Dr. Rajnarayan Tiwari

विश्व पर्यावरण दिवस पर बीएमएचआरसी में विशेष आयोजन
प्रकृति आधारित समाधान जलवायु संकट से निपटने का प्रभावी माध्यम डॉ. राजनारायण तिवारी
भोपाल यश भारत। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आईसीएमआर-भोपाल मेमोरियल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर में पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से विविध कार्यक्रम आयोजित किए गए। एसीएस आईआर विज्ञान क्लब के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रमों के तहत बीएमएचआरसी परिसर में 50 से अधिक पौधों का रोपण किया गया तथा प्रकृति आधारित समाधान विषय पर विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। वृक्षारोपण कार्यक्रम स्वास्थ्य केंद्र बीएमएचआरसी सराय बीएमएचआरसी बाल उद्यान और पैरामेडिकल इंस्टीट्यूट परिसर में आयोजित किया गया। इस दौरान पीपल नीम बरगद और गूलर सहित विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए गए।कार्यक्रम के मुख्य वक्ता आईसीएमआर राष्ट्रीय पर्यावरणीय स्वास्थ्य अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. राजनारायण तिवारी ने विद्यार्थियों शोधार्थियों और कर्मचारियों को संबोधित करते हुए कहा कि जलवायु परिवर्तन जैव विविधता के क्षरण और बढ़ती पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने के लिए प्रकृति आधारित समाधानों नेचर-बेस्ड सॉल्यूशंस को व्यापक स्तर पर अपनाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि केवल वृक्षारोपण पर्याप्त नहीं है बल्कि स्थानीय जैव विविधता और प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र के अनुरूप संरक्षण एवं पुनर्स्थापन के प्रयास किए जाने चाहिए। डॉ. तिवारी ने वनों वेटलैंड्स पीटलैंड्स एग्रोफॉरेस्ट्री जल प्रबंधन और ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के प्रभावी उपाय बताया। उन्होंने कहा कि प्रकृति आधारित समाधान पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ जल सुरक्षा खाद्य सुरक्षा आजीविका संवर्धन और मानव स्वास्थ्य को भी मजबूत बनाते हैं। उन्होंने संरक्षण अभियानों में स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी को सफलता की महत्वपूर्ण शर्त बताया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए बीएमएचआरसी की प्रभारी निदेशक डॉ. मनीषा श्रीवास्तव ने कहा कि पर्यावरणीय असंतुलन के दुष्प्रभाव आज आंधी बाढ़ और भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं के रूप में सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण में अनुसंधान की महत्वपूर्ण भूमिका है और यदि आज प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाली पीढ़ियां हमसे जवाब मांगेंगी। डॉ. श्रीवास्तव ने बताया कि बीएमएचआरसी परिसर का हरित वातावरण शहर के अन्य क्षेत्रों की तुलना में बेहतर है जिससे यहां का तापमान भी अपेक्षाकृत कम रहता है। कार्यक्रम के अंतर्गत करोंद स्थित स्वास्थ्य केंद्र में मरीजों उनके परिजनों और कर्मचारियों को भी पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया गया। उन्हें वृक्षारोपण को बढ़ावा देने पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने और दैनिक जीवन में पर्यावरण अनुकूल व्यवहार अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।







