मध्य प्रदेशराज्य

मैहर में चैत्र नवरात्रि मेले की भव्य शुरुआत : जय माता दी’ के जयकारों से गूंजा त्रिकूट पर्वत

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यश भारत सतना /मैहर। मां शारदा देवी मंदिर में चैत्र नवरात्रि मेले का शुभारंभ गुरुवार तड़के भव्य धार्मिक माहौल के बीच हुआ। सुबह 3 बजे जैसे ही मंदिर के पट खुले, पूरा त्रिकूट पर्वत ‘जय माता दी’ के गगनभेदी जयकारों से गूंज उठा। इसके बाद सुबह 4 बजे प्रधान पुजारी पवन दाऊ महाराज द्वारा माता की विशेष आरती संपन्न कराई गई। नवरात्रि के प्रथम दिन श्रद्धालुओं ने मां के शैलपुत्री स्वरूप की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की।

देशभर से उमड़ा आस्था का सैलाब

नवरात्रि मेले में शामिल होने के लिए देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालुओं का आगमन बुधवार शाम से ही शुरू हो गया था। गुरुवार सुबह मैहर रेलवे स्टेशन पर भारी भीड़ देखने को मिली। हजारों श्रद्धालु ट्रेनों से उतरकर सीधे त्रिकूट पर्वत स्थित मंदिर की ओर रवाना होते नजर आए। यात्रियों की सुविधा के लिए रेलवे स्टेशन पर अतिरिक्त सहायता केंद्र भी स्थापित किए गए हैं।

सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम, 560 जवान तैनात

मेले में उमड़ने वाली लाखों की भीड़ को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने कड़े सुरक्षा इंतजाम किए हैं। कुल 560 पुलिस जवानों की तैनाती की गई है। सुरक्षा व्यवस्था की कमान 2 एडिशनल एसपी, 8 डीएसपी, 10 थाना प्रभारी और 15 सब-इंस्पेक्टर संभाल रहे हैं।

मंदिर परिसर और मेला क्षेत्र में सीसीटीवी कैमरों के साथ-साथ ड्रोन के जरिए भी निगरानी की जा रही है। संवेदनशील स्थानों पर विशेष नजर रखी जा रही है।

वीआईपी दर्शन पर पूरी तरह रोक

जिला कलेक्टर रानी बाटड ने आम श्रद्धालुओं की सुविधा को प्राथमिकता देते हुए नवरात्रि मेले के दौरान वीआईपी दर्शन पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है। साथ ही व्यवस्था बनाए रखने के लिए 14 कार्यपालिक मजिस्ट्रेटों की तैनाती की गई है, जो अलग-अलग शिफ्टों में निगरानी कर रहे हैं।

नौ दिनों तक होगी शक्ति स्वरूपों की आराधना

मंदिर के पुजारी के अनुसार, नवरात्रि के नौ दिनों में माता के नौ स्वरूपों की पूजा की जाएगी। पहले दिन मां शैलपुत्री के दर्शन के बाद क्रमशः ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री की विशेष पूजा-अर्चना संपन्न होगी।

आस्था, श्रद्धा और सुरक्षा का संगम बना मैहर मेला

चैत्र नवरात्रि का यह मेला न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था और सुरक्षा प्रबंधन का भी उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभर रहा है, जहां श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।

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