कटनीमध्य प्रदेश

बसों में आगजनी से निपटने पुख्ता इंतजाम नहीं, दिखावे तक सीमित रह गई कवायद, खानापूर्ति में जुटा परिवहन विभाग

34कटनी, यशभारत। जिले की सडक़ों पर दौडऩे वाली यात्री बसों में सुरक्षा से खिलवाड़ का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। शासन स्तर से दिशा निर्देश जारी होने के बाद भी बसों में आगजनी से निपटने के लिए माकूल इंतजाम कहीं नजर नहीं आते हैं। आग से निपटने के पुख्ता इंतजाम यात्री बसों में न होने की वजह से सफर करने वाले मुसाफिरों के सिर पर हमेशा अनहोनी का खतरा मंडराता रहता है। बताया जाता है कि शहर के प्रियदर्शिनी बस स्टैंड और अघोषित बस स्टैंड से चलने वाली अधिकांश यात्री बसों में आगजनी से निपटने के प्रबंध दिखावे तक सीमित रहते हैं। जिला परिवहन विभाग का अमला तभी यात्री बसों में सुरक्षा व्यवस्था पर गौर करता है जब कभी शासन स्तर से आदेश जारी किया जाता है। इसके अलावा विभाग के अधिकारी और कर्मचारियों को अपनी जिम्मेदारी कभी महसूस नहीं होती है।
नही लिया सबक…
राजस्थान के जैसलमेर में यात्री बस में हुई आगजनी में 20 यात्री जिंदा जल गए थे, इस हादसे के बाद भी परिवहन विभाग ने जिले में चलने वाली यात्री बसों में में सुरक्षा व्यवस्था को परखना अपनी जिम्मेदारी नहीं समझी है। जिले की अधिकांश बसों में अग्निशमन के माकूल इंतजामों का अभाव है। अधिकतर बसों में अग्निशमन यंत्र तो लगे हैं लेकिन वह केवल औपचारिकता पूरी करने के लिए। जानकारों ने बताया कि यात्री बसों में न तो आपातकालीन निकासी द्वार ठीक स्थिति में है और न ही चालक व परिचालक को आग लगने की दशा में अग्निशमन यंत्र के उपयोग का प्रशिक्षण मिला है। मुसाफिरों के लिए सेफ्टी इंस्ट्रक्शन बोडे भी अधिकांश बसों में गायब है। सूत्रों ने बताया कि बसों में केवल दिखावे और प्रशासनिक कार्रवाई से बचने के लिए आक्सीजन सिलेंडर नजर आते हैं। जरूरत पडते पर शोपीस सिलेंडर के जरिए आगजनी से निपटना संभव नहीं होगा।
कबाड़ जैसी हालत में अग्निशमन यंत्र
शहर के दोनों बस स्टैंड से चलने वाली यात्री बसों में सुरक्षा व्यवस्था से खिलवाड़ किया जा रहा है। कई बसों में एक लीटर क्षमता वाले अग्निशमन सिलेंडर तो लगे हैंए लेकिन वे कबाड़ जैसी हालत में हैं। कुछ बसों में ये सिलेंडर बस चालक के समीप रखे रहते हैं। बहुत सी बसों में शोपीस अग्निशमन यंत्रों की वैधता समाप्त हो गई है। बताया जाता है कि लांग स्ट वाली बसों में अग्निशमन यंत्र नजर नहीं आते हैं, जबकि शासन के निर्देश अनुसार सभी यात्री बसों के लिए इसे अनिवार्य किया गया है। कुछ बसों के स्टाफ ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि निरीक्षण के दौरान दिखाने के लिए सिलेंडर बसें में रखे जाते हैंए लेकिन कभी उपयोग नहीं किए गए।
भारी पड़ सकती है जिम्मेदारों की लापरवाही
सवारी वाहनों में सफर करने वाले मुसाफिरों के जीवन की सुरक्षा आखिर किसकी जिम्मेदारी हैघ् जिले में यात्री बसों के साथ ही साथ बहुत से स्कूली वाहनों में भी आग से निपटने के पुख्ता इंतजाम केवल कागजों तक सीमित रहते हैं। जिला परिवहन विभाग और यातायात पुलिस समय.समय पर सवारी वाहनों की जांच करते हुए व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में काम करते हुए नजर नहीं आती है। जब प्रदेश के किसी हिस्से में यात्री वाहनों में कोई बड़ा हादसा सामने आता है तो जिले से लेकर राजधानी तक अचानक सरगर्मी तेज हो जाती है और दनादन वाहनों की जांच और कार्यवाही होने लगती है। यदि जिम्मेदार विभाग समय.समय पर बसए टैक्सियोंए स्कूली वाहनों की जांच पड़ताल करता रहे तो पुख्ता इंतजाम करना वाहन मालिकों की मजबूरी बन जाएगी।
इनका कहना है
संचालकों को बस में अग्निशमन यंत्र लगाने के निर्देश दिए गए हैं। इस मुद्दे पर कड़ाई से जांच कराई जाएगी। यदि अग्निशमन यंत्र लगा नहीं पाया गया या फिर औपचारिकता के यंत्र पाए गए तो कार्रवाई की जाएगी।
-संतोष पाल, अतिरिक्त क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी

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