बदल जाएंगे कटनी की भाजपाई सियासत के समीकरण, अब तक हाशिए पर रहे नेताओं की जागी उम्मीदें, नियुक्तियों में भी दिखेगा असर

कटनी, यशभारत। एमपी में भाजपा की कमान अब नए नेता के हाथ में जाने का गहरा असर कटनी की सियासत पर पड़ेगा। आने वाले समय में कुछ ऐसे नेता पावरफुल बनकर उभरेंगे जो वीडी के राज में लगभग हाशिए पर धकेल दिए गए थे। करीब 5 साल के लंबे अंतराल में कटनी जिले की भाजपाई राजनीति वीडी शर्मा और उनके समर्थकों के इर्द गिर्द केंद्रित थी, इस स्थिति में अब बदलाव होगा। जिले में बड़ी तादात में भाजपा नेता और कार्यकर्ता ऐसे हैं, जो लंबे समय से इस बदलाव की प्रतीक्षा में थे, उनकी उम्मीदें अब परवान चढ़ेंगी। कटनी के बहुसंख्यक भाजपा कार्यकर्ताओं को पार्टी के नए मुखिया हेमंत खंडेलवाल से ढेरों उम्मीदें हैं। कटनी में एकमुखी हो चुका संगठन अब बहुमुखी होगा, इसकी उम्मीद नए परिवर्तन में की जा सकती है।
बैतूल के सीनियर विधायक और संघ की पृष्ठभूमि से जुड़े हेमंत खंडेलवाल का यूं तो कटनी से कोई सीधा नाता कभी नहीं रहा किन्तु कटनी की सियासत से वे काफी हद तक परिचित हैं। पिछले पांच साल से कटनी जिले में संगठन जिस रूप में चला, उसकी पूरी खबर सीएम डॉ मोहन यादव और पार्टी के नए सरदार हेमंत खंडेलवाल को है। आने वाले समय में यहां की भाजपा को और भी अधिक समावेशी और सर्वस्पर्शी बनाने की कोशिशें होगी, ऐसी उम्मीद कल से ही जागृत हो चुकी हैं। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव सत्ता के साथ संगठन में भी अपनी मजबूत पकड़ बनाने में कामयाब हुए हैं, यह बात हेमंत खंडेलवाल के चयन के तौर पर सामने आ चुकी है। पिछले कुछ दिनों से सीएम मोहन यादव की नजर भी लगातार कटनी जिले पर बनी हुई है, और यहां के समीकरणों से वे पूरी तरह परिचित हैं। अब हेमंत खंडेलवाल सत्ता और संगठन के बीच बेहतर तालमेल के साथ काम करते हुए कटनी के असंतुष्ट कार्यकर्ताओं को भी संतुष्ट कर पाएंगे। गौरतलब है कि वीडी शर्मा इसी इलाके से सांसद रहने के साथ पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष थे, लिहाजा इस जिले के भाजपा संगठन को उन्होंने अपने हिसाब से मथ रखा था।
विद्यार्थी परिषद के लोगों का रहा दबदबा, बाकी हाशिए पर
प्रदेश अध्यक्ष और सांसद के डबल पावर के चलते जिले में हर स्तर पर वीडी शर्मा का दखल रहा। पिछले पांच साल में उन्होंने उन्ही लोगों को आगे बढ़ाया जो सीधे तौर पर उनके समर्थक थे। एबीवीपी की पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखने वाले अपने पुराने साथी दीपक सोनी टंडन को जिला संगठन की कमान सौंपना इसी रणनीति का हिस्सा था। उन्हें संघ से मुक्त कराकर सीधे भाजपा में पहले जिला उपाध्यक्ष और बाद में जिलाध्यक्ष बना दिया गया। संगठन के चुनाव में वीडी के पॉवर के चलते दूसरी बार भी टंडन की ताजपोशी हो गई। जिला कार्यकारिणी में भी विद्यार्थी परिषद से जुड़े लोगों को सीधे पदाधिकारी बना दिया गया। इसके अलावा पार्टी के तमाम आयोजनों का प्रभारी भी वीडी के ही खास समर्थकों को बनाया जाता रहा। इन परिस्थितियों में कटनी जिले में बीजेपी की पूरी सियासत एक नेता के इर्द गिर्द केंद्रित होकर रह गई। जो इस गुट से संबंधित था, उसे महत्व दिया गया, बाकी नेता और कार्यकर्ता हाशिए पर धकेल दिए गए। सीनियर महिला नेत्रियों तक को पदों से हटा दिया गया। कटनी के विकास के मामले में भी यही होता आया है। विधायकों के हिस्से के कामों का श्रेय भी सांसद को दिलाने की मजबूरी थी, वजह संगठन की प्रदेश स्तर पर कमान। इसका भय हर नेता को अब तक था। संगठन पर दबदबा कायम रहने के साथ प्रशासनिक स्तर पर भी इसी टीम का सीधा दखल था। अधिकारियों की पोस्टिंग भी अपने हिसाब से कराई गई। अब संगठन का मुखिया बदलने का असर इस पर भी पड़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। जो वरिष्ठ भाजपा कार्यकर्ता लंबे समय से उपेक्षित हैं उनको अब महत्व मिलने की उम्मीद जागी है। जिलाध्यक्ष पर अब दबाव बढ़ता जाएगा। हालांकि सांसद रहने की वजह से वीडी शर्मा का दखल इस क्षेत्र में बना रहेगा।
जिले की नई टीम और नियुक्तियों में मिलेगा महत्व
प्रदेश अध्यक्ष बदलने का असर आने वाले समय में जिले की नई टीम के गठन में भी दिखेगा। अब किसी एक गुट की मनमानी नहीं चल पाएगी। जिलाध्यक्ष जिस तरह एकतरफा संगठन चला रहे थे, उस पर भी लगाम कसी जाएगी। अब अन्य नेताओं का भी दखल बढ़ेगा। इस सबके अलावा आगामी समय में विकास प्राधिकरण, निगम, मंडल, एल्डरमैन समेत अन्य राजनीतिक नियुक्तियों में भी इसका असर पड़ेगा।








