पंचायत में हो रहे भ्रष्टाचार में जनपद स्तर के अधिकारियों की संलिप्तता उजागर

गोटेगांव/नरसिंहपुर यशभारत। गोटेगांव जनपद पंचायत के ग्रामीण अंचलों में अलग ही तरह के भ्रष्टाचार की खबरें मिल रही हैं ग्रामीण शिकायत करते नहीं थकते, पर कार्यवाही के नाम पर केवल हीलाहवाली ही नजर आती है, लेकिन ग्राम पंचायत बुढ़ैना में मामला इससे कहीं ज्यादा अलग है यहां ग्रामवासी तो ग्रामवासी खुद वर्तमान सरपंच और ग्राम रोजगार सहायक भ्रष्टाचार के किस्से सुना रहे हैं और कैसे भ्रष्टाचार किया इसकी बानगी भी खुद की जुबानी बता रहे हैं, इसके बाद भी जनपद स्तर से कोई कार्यवाही ना होना कहीं ना कहीं जनपद स्तर के अधिकारियों की मिली भगत का अंदेशा जताता है।
यह है पूरा मामला
ग्राम पंचायत बुढ़ैना में हाल ही में तीन खेत तालाबों का निर्माण किया गया जिसमें ग्रामीणों ने बताया कि सभी खेत तालाबों में जेसीबी चलाई गई है और मनरेगा के मजदूरों के माध्यम से कोई काम नहीं हुआ है, और सारी राशि मनरेगा के माध्यम से निकालकर पहले जेसीबी संचालक को भुगतान किया जाएगा इसके पश्चात शेष बची राशि का बंदरबांट होगा, ऐसी ही अनियमितताएं पंचायत दर्पण पोर्टल देखने से उजागर हुई जहां इस पंचायत में बिलों का फर्जीवाड़ा भी सामने आया है जिसमें किसी अन्य के नाम पर किसी अन्य को भुगतान किया गया है। केजीएन वैल्डिंग वर्कशॉप उमरिया के एक 38,000 के बिल के भुगतान का है, इस वर्कशाप के मालिक का नाम अनीष खान है, जबकि इस बिल का भुगतान जितेंद्र कुमार जैन के नाम पर किया गया है अभी यह समझ से परे है कि कैसे अनीश खान की दुकान केजीएन वेल्डिंग वर्कशॉप का भुगतान जितेंद्र कुमार जैन के नाम पर किया गया इस तरह के कई अन्य बिल भी संदेह के दायरे में है।
सरपंच ने बताई भ्रष्टाचार की पूरी कहानी
जब इसकी जानकारी लेने ग्राम पंचायत बुढ़ैना के सरंपच जगतसिंह ठाकुर से बात की तो उन्होंने बताया कि तीन तालाब कुल 5 लाख से कुछ अधिक राशि में बने हैं जिनमे 15 दिन तक दो जेसीबी चलाई गई थी जिनके चार लाख रुपए जेसीबी मालिकों को देने हैं इतना ही नहीं सरपंच ने यह भी कहा कि यह राशि मनरेगा के माध्यम से निकाली जाएगी, सरपंच ने बताया की प्रक्रिया अनुसार मजदूरों की फर्जी हाजिरी लगाई जाएगी और फिर उनके खाते में रुपए डाले जाएंगे इसके बाद वह राशि ग्राम रोजगार सहायक सुखराम यादव मजदूरों से वापस लेगा और जेसीबी मालिकों को भुगतान किया जाएगा, शेष बची 1 लाख से अधिक रुपए की राशि में से कुछ राशि जनपद स्तर के अधिकारियों तक देनी पड़ती है हालांकि उपयंत्री विश्वकर्मा जी अच्छे आदमी हैं कम पैसे में भी मान जाते हैं, जब भी आते हैं 2000 -3000 हजार रूपये दे दो इतने में वह खुशी-खुशी मान जाते हैं।
ग्राम रोजगार सहायक ने जिले भर की प्रणाली पर उठाए सवाल
मनरेगा का काम ग्राम पंचायत में मुख्य रूप से ग्राम रोजगार सहायक के जिम्मे होता है, ग्राम पंचायत बुढ़ैना में भी यह काम ग्राम रोजगार सहायक सुखराम यादव के जिम्मे है जब सुखराम से पूछा गया कि आपकी पंचायत में मनरेगा में व्यापक रूप से भ्रष्टाचार और मशीनों का प्रयोग हो रहा है तो सुखराम ने कहा कि जिले की कोई एक ऐसी पंचायत बता दो जहां मजदूरों से काम हो रहा है पूरे जिले में मशीनों से काम हो रहा है, फिर फर्जी हाजिरी लगाकर मजदूरो के माध्यम से भुगतान निकाला जाता है और जिला पंचायत सीईओ तक सबको इसकी जानकारी है, और रही ज्यादा पैसे निकालने और भ्रष्टाचार की बात तो जिन मजदूरों के खाते में पैसे डालते हैं, उन मजदूर में से कुछ तो पैसे वापस ही नहीं करते और जो वापस करते हैं तो उन्हें भी कुछ पैसा देना पड़ता है पंचायत के पास थोड़ा ही पैसा शेष बचता है जिसमें बहुत सारे अधिकारियों को भी देखना पड़ता है।
खुद को दूध का धुला बताते रहे उपयंत्री विश्वकर्मा
जब इस पूरे मामले और सरपंच के द्वारा दिए गए कबूलनामे वाले बयान के आधार पर ग्राम पंचायत के उपयंत्री कुलदीप विश्वकर्मा से बात की तो उन्होंने साफ इंकार कर दिया, इतना ही नहीं उपयंत्री ने तो यह भी कह दिया कि उन्होंने तालाबों में मजदूरों को काम करते हुए देखा है, जबकि पूर्व में ही ग्राम रोजगार सहायक और सरपंच अपने बयानों में यह कह चुके थे कि तालाब के निर्माण में 15 दिन जेसीबी चलाई गई हैं उसके बावजूद उपयंत्री विश्वकर्मा जी को जो मजदूर दिखाई दिए या तो वह उन्होंने जागते हुए सपना देखा होगा या फिर किसी और पंचायत के चल रहे काम को बुढ़ैना का काम समझ बैठे होंगे, वहीं सरपंच के द्वारा बताए गए लेन-देन के बारे में भी वे स्पष्ट रूप से मना नहीं कर सके, हालांकि उन्होंने यह जरूर कहा कि सरपंच जो कह रहा है उस पर वे क्या प्रतिक्रिया दें, उस बारे में तो केवल सरपंच ही बता सकता है।
कबूलनामे और फर्जीवाड़े में कार्यवाही की दरकार
ग्राम पंचायत बुढ़ैना में हुए इस तरह के पूरे व्यापक भ्रष्टाचार और हेर-फेर के मामले में ग्राम पंचायत से लेकर जनपद स्तर के उपयंत्री तक बंदरबांट में शामिल है जिसका कुबूलनामा खुद सरपंच ओर सहसचिव कर चुके हैं, बीते माह में विधानसभा के विधायक महेंद्र नागेश भी पत्र लिखकर जिला पंचायत सीईओ को विधानसभा गोटेगांव की पंचायत में चल रहा है भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के विरुद्ध जांच कर उचित कार्यवाही करने की मांग कर चुके हैं, इसके बावजूद भी ग्राम पंचायत में हुए भ्रष्टाचार पर यदि कोई ठोस और तथ्यात्मक कार्यवाही नहीं होती है तो सरपंच द्वारा बताए गए अधिकारियों के मिली भगत के आरोप स्वयं सिद्ध हो जाएंगे।
इनका यह है कहना….
15 दिन 2 जेसीबी मशीन चलवाई गई हैं जिनमें तीन खेत तलाबों का निर्माण किया गया है अब मजदूरों के माध्यम से पैसे का आहरण कर मशीन मालिकों को भुगतान किया जाएगा, उपयंत्री विश्वकर्मा अच्छे आदमी हैं थोड़े पैसे में भी मान जाते हैं।
जगत सिंह ठाकुर- सरपंच
जिले में ऐसी कौन सी पंचायत है जिसमें मनरेगा में जेसीबी नहीं चल रही है सभी में जेसीबी चलती है और फिर मजदूरों के माध्यम से पैसे का भुगतान किया जाता है जिला पंचायत सीईओ तक सबको जानकारी है।
सुखराम यादव- ग्राम रोजगार सहायक
जो आरोप सरपंच ने लगाए है उस पर क्या प्रतिक्रिया दूं इस बारे में आप उनसे ही जानकारी लें तो बेहतर रहेगा।
कुलदीप विश्वकर्मा- उपयंत्री
गोटेगांव विधानसभा की पंचायतों में भ्रष्टाचार और अनियमित्ताओ की जानकारी मिल रही थी पत्र लिखकर जिला पंचायत सीईओ को उचित कार्यवाही करने की मांग की है।
महेंद्र नागेश- विधायक गोटेगांव







